📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Singer Ravindra Singh
राजनीति
रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर से जन‑संवाद यात्रा शुरू, ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्र में सुधार की मांग
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 26 सित. 2026, 05:15 PM
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राजस्थान के विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर से जन‑संवाद यात्रा शुरू की, ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्र की वैधता बढ़ाने और राज्य‑स्तर के प्रमाण‑पत्र को राष्ट्रीय मान्यता देने की मांग की।
रविंद्र सिंह भाटी, राजस्थान विधानसभा के विधायक, ने सोमवार को बाड़मेर में जन‑संवाद यात्रा का आरम्भ किया, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण के नियमों को सरल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। स्थानीय नागरिकों, सामुदायिक नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने उन्होंने दो मुख्य सुधारों की मांग रखी।
भाटी ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्र की वैधता अवधि को बढ़ाने और राज्य द्वारा जारी प्रमाण‑पत्र को केंद्र में बिना अतिरिक्त जाँच के मान्यता देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था लाभार्थियों के लिए अनिश्चितता पैदा करती है और आरक्षण नीति के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा बनती है।
2019 में लागू किए गए ईडब्ल्यूएस आरक्षण ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित की हैं, जो अन्य जाति‑आधारित आरक्षण में शामिल नहीं हैं। विभिन्न राज्यों में प्रमाण‑पत्र जारी किए जाने के बावजूद वैधता अवधि और मान्यता में असंगतियों के कारण आवेदकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भाटी का अभियान इन खामियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार से एकरूप मानकों की मांग करता है।
विधायक ने बताया कि बाड़मेर से शुरू हुई यह यात्रा राज्य‑व्यापी टूर का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य जनता की राय इकट्ठा करना और राजनीतिक हितधारकों के बीच सहमति बनाना है। वे अगले हफ्ते जयपुर में वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे, जहाँ एकत्रित मुद्दों को प्रस्तुत कर विधायी संशोधन का प्रस्ताव रखेंगे।
भाटी ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण‑पत्र की वैधता अवधि को बढ़ाने और राज्य द्वारा जारी प्रमाण‑पत्र को केंद्र में बिना अतिरिक्त जाँच के मान्यता देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था लाभार्थियों के लिए अनिश्चितता पैदा करती है और आरक्षण नीति के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा बनती है।
2019 में लागू किए गए ईडब्ल्यूएस आरक्षण ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित की हैं, जो अन्य जाति‑आधारित आरक्षण में शामिल नहीं हैं। विभिन्न राज्यों में प्रमाण‑पत्र जारी किए जाने के बावजूद वैधता अवधि और मान्यता में असंगतियों के कारण आवेदकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भाटी का अभियान इन खामियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार से एकरूप मानकों की मांग करता है।
विधायक ने बताया कि बाड़मेर से शुरू हुई यह यात्रा राज्य‑व्यापी टूर का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य जनता की राय इकट्ठा करना और राजनीतिक हितधारकों के बीच सहमति बनाना है। वे अगले हफ्ते जयपुर में वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे, जहाँ एकत्रित मुद्दों को प्रस्तुत कर विधायी संशोधन का प्रस्ताव रखेंगे।