रावण वध और भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ बाम्बोली की रामलीला का भव्य समापन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पूरा गांव
रावण वध और भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ बाम्बोली की रामलीला का भव्य समापन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पूरा गांव
रामगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम बाम्बोली में कई वर्षों से चली आ रही रामलीला मंचन की परंपरा का गुरुवार रात्रि को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ समापन हो गया। रामलीला के अंतिम दिन कलाकारों ने भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध, रावण वध तथा भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक का मनमोहक मंचन किया। भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारों से आसमान गुंजायमान कर दिया।
अंतिम दिन रामलीला देखने के लिए बाम्बोली गांव सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचे। मंच पर जैसे ही भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया, दर्शक भावविभोर हो उठे। भगवान श्रीराम के हाथों रावण वध के मंचन के दौरान अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन तथा उनके भव्य राज्याभिषेक का दृश्य प्रस्तुत किया गया। राजतिलक के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए।
रामलीला के समापन पर विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों का ग्रामीणों और रामलीला कमेटी के सदस्यों ने माला पहनाकर तथा साफा बांधकर सम्मान किया। कलाकारों के अभिनय और संवादों की ग्रामीणों ने सराहना की। इस दौरान कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए आयोजन में सहयोग देने वाले ग्रामीणों का भी आभार जताया गया।
रामलीला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बाम्बोली गांव में कई वर्षों से रामलीला मंचन की परंपरा चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष दशहरे के बाद रामलीला का शुभारंभ किया जाता है तथा दीपावली से तीन दिन पहले इसका समापन होता है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह रहता है। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचते हैं।
रामलीला के माध्यम से ग्रामीणों को भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। रावण वध के साथ अधर्म पर धर्म की विजय और श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ रामराज्य की परिकल्पना का संदेश देते हुए आयोजन का समापन हुआ। पूरे गांव में देर रात तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
रामगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम बाम्बोली में कई वर्षों से चली आ रही रामलीला मंचन की परंपरा का गुरुवार रात्रि को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ समापन हो गया। रामलीला के अंतिम दिन कलाकारों ने भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध, रावण वध तथा भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक का मनमोहक मंचन किया। भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारों से आसमान गुंजायमान कर दिया।
अंतिम दिन रामलीला देखने के लिए बाम्बोली गांव सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचे। मंच पर जैसे ही भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया, दर्शक भावविभोर हो उठे। भगवान श्रीराम के हाथों रावण वध के मंचन के दौरान अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन तथा उनके भव्य राज्याभिषेक का दृश्य प्रस्तुत किया गया। राजतिलक के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए।
रामलीला के समापन पर विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों का ग्रामीणों और रामलीला कमेटी के सदस्यों ने माला पहनाकर तथा साफा बांधकर सम्मान किया। कलाकारों के अभिनय और संवादों की ग्रामीणों ने सराहना की। इस दौरान कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए आयोजन में सहयोग देने वाले ग्रामीणों का भी आभार जताया गया।
रामलीला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बाम्बोली गांव में कई वर्षों से रामलीला मंचन की परंपरा चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष दशहरे के बाद रामलीला का शुभारंभ किया जाता है तथा दीपावली से तीन दिन पहले इसका समापन होता है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह रहता है। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचते हैं।
रामलीला के माध्यम से ग्रामीणों को भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। रावण वध के साथ अधर्म पर धर्म की विजय और श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ रामराज्य की परिकल्पना का संदेश देते हुए आयोजन का समापन हुआ। पूरे गांव में देर रात तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।