📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Balisuraj
अपराध
राजस्थान पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के बाद ‘गोल्डन आवर’ में तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया
✍️ patrika.com
🗓 11 सित. 2026, 07:32 PM
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राजस्थान पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के शिकार को तुरंत कार्रवाई करने और पहले घंटे में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया, जिससे धन वसूली की संभावना बढ़ेगी।
राजस्थान पुलिस ने आज एक चेतावनी जारी की, जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार को तुरंत शांत रहने और तेज़ी से कदम उठाने का आग्रह किया गया है। अधिकारियों ने "गोल्डन आवर" की अवधारणा पर प्रकाश डाला – यानी धोखाधड़ी का पता चलने के बाद पहले साठ मिनट, जब रिपोर्ट करने से अपराधियों को पकड़ने और खोए हुए पैसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
शिकारों को सभी डिजिटल साक्ष्य, जैसे स्क्रीनशॉट, चैट लॉग और लेन‑देन विवरण, को सुरक्षित रखने और फिर हटाने से पहले पुलिस को सौंपने की सलाह दी गई है। उन्हें तुरंत राज्य साइबर‑क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करना या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराना चाहिए, साथ में एकत्रित जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
पुलिस ने बताया कि त्वरित रिपोर्टिंग से फोरेंसिक टीम सर्वर लॉग सुरक्षित कर सकती है, बैंक खाते फ्रीज़ कर सकती है और टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय कर सकती है, जिससे अपराधियों को पकड़ना आसान हो जाता है। देर से रिपोर्ट करने से महत्वपूर्ण डेटा खो सकता है, जिससे जांच कठिन हो जाती है।
यह चेतावनी राजस्थान पुलिस द्वारा चलाए जा रहे व्यापक जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनता को सामान्य ऑनलाइन धोखाधड़ी और उनसे बचने के उपायों के बारे में शिक्षित करना है। अधिकारियों ने स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में कार्यशालाओं का आयोजन करने की योजना भी बताई है, ताकि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित किया जा सके।
शिकारों को सभी डिजिटल साक्ष्य, जैसे स्क्रीनशॉट, चैट लॉग और लेन‑देन विवरण, को सुरक्षित रखने और फिर हटाने से पहले पुलिस को सौंपने की सलाह दी गई है। उन्हें तुरंत राज्य साइबर‑क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करना या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराना चाहिए, साथ में एकत्रित जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
पुलिस ने बताया कि त्वरित रिपोर्टिंग से फोरेंसिक टीम सर्वर लॉग सुरक्षित कर सकती है, बैंक खाते फ्रीज़ कर सकती है और टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय कर सकती है, जिससे अपराधियों को पकड़ना आसान हो जाता है। देर से रिपोर्ट करने से महत्वपूर्ण डेटा खो सकता है, जिससे जांच कठिन हो जाती है।
यह चेतावनी राजस्थान पुलिस द्वारा चलाए जा रहे व्यापक जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनता को सामान्य ऑनलाइन धोखाधड़ी और उनसे बचने के उपायों के बारे में शिक्षित करना है। अधिकारियों ने स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में कार्यशालाओं का आयोजन करने की योजना भी बताई है, ताकि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित किया जा सके।