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28 जुल. 2026
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राजस्थान पुलिस ने पाइरेटेड सॉफ्टवेयर से बनाई गई नकली आधार पर कार्रवाई की
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Balisuraj
अपराध

राजस्थान पुलिस ने पाइरेटेड सॉफ्टवेयर से बनाई गई नकली आधार पर कार्रवाई की

✍️ Bhaskar English 🗓 28 जुल. 2026, 09:04 AM 👁 2

राजस्थान की पुलिस ने पाया कि पाइरेटेड सॉफ्टवेयर से नकली आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिसमें 2,000 रुपये देकर आयु 11 वर्ष बढ़ाई जाती है। इस योजना में नकली मृत्यु प्रमाणपत्र भी शामिल थे।

राजस्थान पुलिस ने पाइरेटेड सॉफ्टवेयर का उपयोग कर नकली आधार कार्ड बनाने वाले नेटवर्क की पहचान की है। इस योजना में आवेदकों से 2,000 रुपये वसूले जाते हैं ताकि उनकी आयु 11 वर्ष बढ़ाई जा सके। नकली आधार कार्ड के साथ ही धोखेबाज नकली मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनाते हैं।

शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जब एक नागरिक ने अपने आधार विवरण में असंगति पाई। दस्तावेजों की फोरेंसिक जाँच से पता चला कि अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ और बायोमेट्रिक डेटा में छेड़छाड़ की गई है।

राजस्थान पुलिस ने इस ऑपरेशन में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार किया और पाइरेटेड सॉफ्टवेयर व नकली दस्तावेज़ जप्त कर लिए। वे नेटवर्क के दायरे और आधार डेटाबेस पर पड़ने वाले प्रभाव की जाँच कर रहे हैं।

अधिकारियों ने नागरिकों को UIDAI पोर्टल के माध्यम से अपने आधार विवरण की जाँच करने और किसी भी असामान्यता की सूचना देने की सलाह दी है। वे यह भी चेतावनी देते हैं कि पहचान दस्तावेज़ बनाने या संशोधित करने के लिए पाइरेटेड सॉफ्टवेयर का उपयोग करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और आधार अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।

यह मामला डिजिटल पहचान धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे और सख्त सत्यापन तंत्र की आवश्यकता को उजागर करता है।
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