📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shalivahan2
नौकरी
दो हाथों की हानि के बावजूद राजस्थान के व्यक्ति ने आरएएस पास कर तहसीलदार बने
✍️ India Today
🗓 04 अक्टू. 2026, 04:31 PM
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दस साल की उम्र में दोनों हथेलियाँ खोने के बाद भी एक राजस्थान निवासी ने दूसरे प्रयास में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर तहसीलदार का पद हासिल किया।
राजस्थान के एक व्यक्ति ने, जो दस साल की उम्र में दोनों हथेलियाँ खो बैठे थे, दूसरे प्रयास में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) परीक्षा पास करके तहसीलदार का पद प्राप्त किया है। गंभीर शारीरिक बाधा के बावजूद, उन्होंने अनुकूलित उपकरणों और मजबूत समर्थन नेटवर्क की मदद से अपनी पढ़ाई जारी रखी।
पहले प्रयास में असफलता के बाद उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति को पुनः व्यवस्थित किया, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पर अधिक ध्यान दिया, जहाँ हाथों की जरूरत नहीं थी। दूसरे प्रयास में सफलता मिलने पर उन्हें तहसीलदार के रूप में नियुक्त किया गया।
यह नियुक्ति सरकारी भर्ती में समावेशिता के बढ़ते महत्व को दर्शाती है, यह सिद्ध करती है कि शारीरिक विकलांगता किसी को सिविल सेवा के पदों से नहीं रोक सकती। अब वह राजस्थान के किसी जिले में तहसीलदार के रूप में कार्य करेंगे, जहाँ उनकी प्रशासनिक दक्षता और दृढ़ संकल्प का उदाहरण स्थानीय समुदाय को प्रेरित करेगा।
उनकी कहानी राष्ट्रीय मीडिया में भी छाई हुई है, जिससे अन्य विकलांग उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलता है और यह संदेश मिलता है कि दृढ़ संकल्प से सबसे कठिन बाधाएँ भी पार की जा सकती हैं।
पहले प्रयास में असफलता के बाद उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति को पुनः व्यवस्थित किया, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पर अधिक ध्यान दिया, जहाँ हाथों की जरूरत नहीं थी। दूसरे प्रयास में सफलता मिलने पर उन्हें तहसीलदार के रूप में नियुक्त किया गया।
यह नियुक्ति सरकारी भर्ती में समावेशिता के बढ़ते महत्व को दर्शाती है, यह सिद्ध करती है कि शारीरिक विकलांगता किसी को सिविल सेवा के पदों से नहीं रोक सकती। अब वह राजस्थान के किसी जिले में तहसीलदार के रूप में कार्य करेंगे, जहाँ उनकी प्रशासनिक दक्षता और दृढ़ संकल्प का उदाहरण स्थानीय समुदाय को प्रेरित करेगा।
उनकी कहानी राष्ट्रीय मीडिया में भी छाई हुई है, जिससे अन्य विकलांग उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलता है और यह संदेश मिलता है कि दृढ़ संकल्प से सबसे कठिन बाधाएँ भी पार की जा सकती हैं।