📷 चित्र स्रोत: Hindustan Times (via NewsData)
अपराध
राजस्थान के आईपीएस अधिकारी पर विला खरीद जांच में एपीओ आदेश
✍️ Hindustan Times
🗓 01 नव. 2026, 06:21 AM
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राजस्थान के एक आईपीएस अधिकारी को एपीओ आदेश दिया गया है, क्योंकि अनंता रिसॉर्ट, बुजधा, उदयपुर में एगरवाल और माथुर द्वारा मार्च 2026 में प्रत्येक दस विला खरीदने के आरोपों की जांच चल रही है।
राजस्थान पुलिस विभाग ने बुजधा, उदयपुर के अनंता रिसॉर्ट में बड़े पैमाने पर विला खरीद के संबंध में चल रही जांच के बाद एक अनाम आईपीएस अधिकारी पर प्रशासनिक प्रीमाइसेस ऑर्डर (एपीओ) जारी किया है। एपीओ के तहत अधिकारी को जांच के दौरान अपने आधिकारिक कर्तव्यों से अस्थायी रूप से हटाया गया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एगरवाल और माथुर नाम के दो व्यक्तियों ने मार्च 2026 में रिसॉर्ट में प्रत्येक दस विला खरीदे, प्रत्येक विला की कीमत लगभग ₹15 लाख बताई गई है। कुल बीस विला की इस खरीदारी ने अधिकार के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के प्रश्न उठाए हैं।
राज्य ने एंटी‑करप्शन ब्यूरो और जिला कलेक्टर कार्यालय को मिलाकर एक विस्तृत जांच शुरू की है। अधिकारी ने अभी तक आईपीएस अधिकारी की पहचान या alleged उल्लंघन की सटीक प्रकृति का खुलासा नहीं किया है, क्योंकि मामला संवेदनशील है।
एपीओ राजस्थान में एक सामान्य प्रशासनिक उपाय है, जिसका उपयोग किसी भी अधिकारी को संभावित दुराचार की स्पष्टता तक अस्थायी रूप से निलंबित करने के लिए किया जाता है। अभी तक कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाए गए हैं, और अधिकारी को जांच में सहयोग करने को कहा गया है।
यदि जांच में कोई गलत कार्य सिद्ध होता है, तो अधिकारी को भारतीय पुलिस सेवा के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, और विला लेन‑देनों को आगे कानूनी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एगरवाल और माथुर नाम के दो व्यक्तियों ने मार्च 2026 में रिसॉर्ट में प्रत्येक दस विला खरीदे, प्रत्येक विला की कीमत लगभग ₹15 लाख बताई गई है। कुल बीस विला की इस खरीदारी ने अधिकार के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के प्रश्न उठाए हैं।
राज्य ने एंटी‑करप्शन ब्यूरो और जिला कलेक्टर कार्यालय को मिलाकर एक विस्तृत जांच शुरू की है। अधिकारी ने अभी तक आईपीएस अधिकारी की पहचान या alleged उल्लंघन की सटीक प्रकृति का खुलासा नहीं किया है, क्योंकि मामला संवेदनशील है।
एपीओ राजस्थान में एक सामान्य प्रशासनिक उपाय है, जिसका उपयोग किसी भी अधिकारी को संभावित दुराचार की स्पष्टता तक अस्थायी रूप से निलंबित करने के लिए किया जाता है। अभी तक कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाए गए हैं, और अधिकारी को जांच में सहयोग करने को कहा गया है।
यदि जांच में कोई गलत कार्य सिद्ध होता है, तो अधिकारी को भारतीय पुलिस सेवा के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, और विला लेन‑देनों को आगे कानूनी जांच का सामना करना पड़ सकता है।