📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sojat
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राजस्थान हाईकोर्ट ने 43 साल के प्लॉट विवाद में नगरपालिका प्रमुख को बुलाई
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 17 अक्टू. 2026, 10:16 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने 43 साल बाद भी प्लॉट नहीं मिलने के मामले में नगरपालिका अध्यक्ष और अधिकारियों को हाजिर होने का आदेश दिया।
राजस्थान के एक निवासी ने चार दशकों से अधिक समय पहले सरकारी प्लॉट के लिए पूरी राशि जमा कर दी थी, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिली। इस कारण वह हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहा है, जिसमें वह अपने अधिकार की पूर्ति की मांग कर रहा है।
हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुना और नगरपालिका के अध्यक्ष तथा प्लॉट आवंटन के प्रभारी अधिकारी को निर्धारित तिथि पर हाजिर होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि यदि वे अनुपालन नहीं करेंगे तो contempt (अवमानना) के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
राजस्थान के कई नगरपालिकाओं में प्लॉट आवंटन में देरी की समस्या पहले भी देखी गई है, जिससे नागरिकों में निराशा और कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं। इस आदेश के माध्यम से न्यायालय अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना चाहता है और याचिकाकर्ता को शीघ्र ही प्लॉट या उचित मुआवजा दिलाने की दिशा में कदम उठाने का इशारा कर रहा है।
अब तक नगरपालिका ने कोर्ट के आदेश पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मामला उन कई लोगों के लिए चेतावनी बन सकता है जो सरकारी आवास योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासनिक अड़चनें कई दशकों तक बनी रहती हैं।
हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुना और नगरपालिका के अध्यक्ष तथा प्लॉट आवंटन के प्रभारी अधिकारी को निर्धारित तिथि पर हाजिर होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि यदि वे अनुपालन नहीं करेंगे तो contempt (अवमानना) के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
राजस्थान के कई नगरपालिकाओं में प्लॉट आवंटन में देरी की समस्या पहले भी देखी गई है, जिससे नागरिकों में निराशा और कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं। इस आदेश के माध्यम से न्यायालय अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना चाहता है और याचिकाकर्ता को शीघ्र ही प्लॉट या उचित मुआवजा दिलाने की दिशा में कदम उठाने का इशारा कर रहा है।
अब तक नगरपालिका ने कोर्ट के आदेश पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मामला उन कई लोगों के लिए चेतावनी बन सकता है जो सरकारी आवास योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासनिक अड़चनें कई दशकों तक बनी रहती हैं।