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स्थानीय
राजस्थान हाईकोर्ट ने 220 kV लाइन के नीचे बने पंपिंग स्टेशन पर जवाब मांगा
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 30 सित. 2026, 12:30 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के अनुसार 220 kV हाई‑टेंशन लाइन के नीचे पंपिंग स्टेशन बनाया गया है। कोर्ट ने राजस्थान राज्य टीवी नेटवर्क से छह हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जयपुर में 220 kV हाई‑टेंशन लाइन के नीचे एक पंपिंग स्टेशन बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह निर्माण सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करता है और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा पैदा करता है।
याचिका में बताया गया है कि पंपिंग स्टेशन, जो स्थानीय नगरपालिका को पानी की आपूर्ति करता है, बिना बिजली प्राधिकरण से उचित अनुमति के स्थापित किया गया। इसके पास हाई‑टेंशन लाइन होने से स्टेशन की संरचनात्मक अखंडता और विद्युत ग्रिड की सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है।
इसके जवाब में, राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य टीवी नेटवर्क (RVPNL) को नोटिस जारी किया है, जिसमें छह हफ्ते के भीतर लिखित उत्तर देने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने परमिट, सुरक्षा आकलन और बिजली उपयोगिताओं के साथ समन्वय के दस्तावेज भी मांगे हैं।
यह निर्णय सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की जांच के प्रति कोर्ट की तत्परता को दर्शाता है। यदि याचिका के दावे सत्य सिद्ध होते हैं, तो राज्य को सुधारात्मक कदम उठाने या साइट की उपयुक्तता का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
याचिका में बताया गया है कि पंपिंग स्टेशन, जो स्थानीय नगरपालिका को पानी की आपूर्ति करता है, बिना बिजली प्राधिकरण से उचित अनुमति के स्थापित किया गया। इसके पास हाई‑टेंशन लाइन होने से स्टेशन की संरचनात्मक अखंडता और विद्युत ग्रिड की सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है।
इसके जवाब में, राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य टीवी नेटवर्क (RVPNL) को नोटिस जारी किया है, जिसमें छह हफ्ते के भीतर लिखित उत्तर देने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने परमिट, सुरक्षा आकलन और बिजली उपयोगिताओं के साथ समन्वय के दस्तावेज भी मांगे हैं।
यह निर्णय सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की जांच के प्रति कोर्ट की तत्परता को दर्शाता है। यदि याचिका के दावे सत्य सिद्ध होते हैं, तो राज्य को सुधारात्मक कदम उठाने या साइट की उपयुक्तता का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता पड़ सकती है।