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राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर SP नियुक्ति पर RLP को चुनाव आयोग में अभ्यावेदन करने का निर्देश दिया
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 02 सित. 2026, 07:36 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को लेकर RLP की जनहित याचिका खारिज कर दी और पार्टी को चुनाव आयोग में अभ्यावेदन करने का निर्देश दिया, अब आयोग इस मुद्दे पर विचार करेगा।
राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (SP) की नई नियुक्ति को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि यह मुद्दा न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे चुनाव आयोग को सौंपना चाहिए।
RLP ने इस नियुक्ति को क्षेत्रीय चुनावों पर असर डालने वाला मानते हुए न्यायालय से रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने पाया कि इस चरण में हस्तक्षेप का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी शिकायत चुनाव आयोग के समक्ष अभ्यावेदन के रूप में प्रस्तुत करे, क्योंकि चुनाव आयोग ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की जाँच करने का अधिकार रखता है। आयोग अब इस अभ्यावेदन की समीक्षा करेगा और आवश्यक कदम तय करेगा।
यह आदेश भारत में चुनाव संबंधी विवादों के निपटारे के लिए उचित प्रक्रिया को रेखांकित करता है, जिससे राजनीतिक दलों को प्रशासनिक नियुक्तियों के प्रभाव को लेकर न्यायालय के बजाय चुनाव आयोग से संपर्क करना चाहिए।
अभी तक चुनाव आयोग ने इस अभ्यावेदन पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उसका आगामी निर्णय ही तय करेगा कि नागौर SP की नियुक्ति को आगे कोई बाधा मिलेगी या नहीं।
RLP ने इस नियुक्ति को क्षेत्रीय चुनावों पर असर डालने वाला मानते हुए न्यायालय से रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने पाया कि इस चरण में हस्तक्षेप का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी शिकायत चुनाव आयोग के समक्ष अभ्यावेदन के रूप में प्रस्तुत करे, क्योंकि चुनाव आयोग ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की जाँच करने का अधिकार रखता है। आयोग अब इस अभ्यावेदन की समीक्षा करेगा और आवश्यक कदम तय करेगा।
यह आदेश भारत में चुनाव संबंधी विवादों के निपटारे के लिए उचित प्रक्रिया को रेखांकित करता है, जिससे राजनीतिक दलों को प्रशासनिक नियुक्तियों के प्रभाव को लेकर न्यायालय के बजाय चुनाव आयोग से संपर्क करना चाहिए।
अभी तक चुनाव आयोग ने इस अभ्यावेदन पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उसका आगामी निर्णय ही तय करेगा कि नागौर SP की नियुक्ति को आगे कोई बाधा मिलेगी या नहीं।