📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vishnu Godara NTD
राजनीति
राजस्थान हाईकोर्ट ने सांसद हनुमान बेनीवाल को नागौर FIR में अंतरिम राहत दी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 06 अक्टू. 2026, 02:31 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट के जोधपुर पीठ ने नागौर के कुचेरा थाने में दर्ज FIR में दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल को अंतरिम राहत दी।
राजस्थान हाईकोर्ट के जोधपुर पीठ ने गुरुवार को अंतरिम आदेश जारी किया, जिससे नागौर जिले के कुचेरा थाने में सांसद हनुमान बेनीवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर में दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई। यह राहत तब मिली जब सांसद ने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसमें अनिर्दिष्ट आरोप लगे थे।
यह आदेश एफआईआर को खारिज नहीं करता, बल्कि आगे की कार्रवाई को तब तक स्थगित करता है जब तक पक्ष अपने‑अपने तर्क प्रस्तुत नहीं कर लेते। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च प्रोफ़ाइल मामलों में स्थिति बनाए रखने के लिए ऐसी अंतरिम राहत सामान्य है।
किसान एवं किसान कल्याण के राज्य मंत्री तथा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख नेता बेनीवाल पहले भी राजस्थान में कानूनी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। उनके वकील ने कहा कि एफआईआर राजनीतिक कारणों से दायर की गई है, जिससे कोर्ट ने हस्तक्षेप किया। हाईकोर्ट का यह निर्णय आगे की सुनवाइयों में पुनः विचार किया जाएगा, और अंतिम निर्णय तक एफआईआर रिकॉर्ड में बना रहेगा।
यह विकास राज्य में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि विपक्षी दल इस मामले को शासक गठबंधन की कानून व्यवस्था के प्रबंधन पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
यह आदेश एफआईआर को खारिज नहीं करता, बल्कि आगे की कार्रवाई को तब तक स्थगित करता है जब तक पक्ष अपने‑अपने तर्क प्रस्तुत नहीं कर लेते। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च प्रोफ़ाइल मामलों में स्थिति बनाए रखने के लिए ऐसी अंतरिम राहत सामान्य है।
किसान एवं किसान कल्याण के राज्य मंत्री तथा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख नेता बेनीवाल पहले भी राजस्थान में कानूनी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। उनके वकील ने कहा कि एफआईआर राजनीतिक कारणों से दायर की गई है, जिससे कोर्ट ने हस्तक्षेप किया। हाईकोर्ट का यह निर्णय आगे की सुनवाइयों में पुनः विचार किया जाएगा, और अंतिम निर्णय तक एफआईआर रिकॉर्ड में बना रहेगा।
यह विकास राज्य में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि विपक्षी दल इस मामले को शासक गठबंधन की कानून व्यवस्था के प्रबंधन पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।