📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TrendSPLEND
अपराध
राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 लोगों के रौंदे मामले में पुलिस जांच पर नाराजगी जताई, नागौर एसपी को किया तलब
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 09 सित. 2026, 09:47 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने रियां बड़ी के बजरी विवाद से जुड़े 12 लोगों के रौंदे मामले की पुलिस जांच पर असंतोष जताया और नागौर एसपी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को रियां बड़ी में बजरी विवाद के दौरान 12 लोगों के रौंदे जाने की घटना की पुलिस जांच पर कड़ी निंदा की। कोर्ट ने जांच में प्रक्रियात्मक चूक और साक्ष्य संग्रह में कमी को उजागर किया, जिससे न्याय के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
इसके बाद बेंच ने नागौर जिले के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) को नोटिस जारी कर कोर्ट में उपस्थित होकर अब तक की जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। एसपी से मौजूदा फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान भी जमा करने को कहा गया।
केस के बारे में जानकारी रखने वाले कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि न्यायपालिका पुलिस जांच को विधायी मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने में सतर्क है, विशेषकर कई मौतों वाले मामलों में। कोर्ट ने एसपी को अनुपालन की अंतिम तिथि निर्धारित की है, जिसके बाद आगे की न्यायिक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
बजरी के स्वामित्व को लेकर चल रहे इस स्थानीय विवाद में हुई इस घटना ने पहले ही जनता का ध्यान आकर्षित कर लिया है और जवाबदेही की माँगें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों ने जांच को तेज़ करने का आश्वासन दिया है, पर हाईकोर्ट की चेतावनी यह संकेत देती है कि जांच पूरी और पारदर्शी होनी चाहिए।
मामला अब न्यायिक निगरानी में है, और आगे की किसी भी प्रगति को मीडिया और स्थानीय समुदाय द्वारा बारीकी से देखा जाएगा।
इसके बाद बेंच ने नागौर जिले के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) को नोटिस जारी कर कोर्ट में उपस्थित होकर अब तक की जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। एसपी से मौजूदा फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान भी जमा करने को कहा गया।
केस के बारे में जानकारी रखने वाले कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि न्यायपालिका पुलिस जांच को विधायी मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने में सतर्क है, विशेषकर कई मौतों वाले मामलों में। कोर्ट ने एसपी को अनुपालन की अंतिम तिथि निर्धारित की है, जिसके बाद आगे की न्यायिक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
बजरी के स्वामित्व को लेकर चल रहे इस स्थानीय विवाद में हुई इस घटना ने पहले ही जनता का ध्यान आकर्षित कर लिया है और जवाबदेही की माँगें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों ने जांच को तेज़ करने का आश्वासन दिया है, पर हाईकोर्ट की चेतावनी यह संकेत देती है कि जांच पूरी और पारदर्शी होनी चाहिए।
मामला अब न्यायिक निगरानी में है, और आगे की किसी भी प्रगति को मीडिया और स्थानीय समुदाय द्वारा बारीकी से देखा जाएगा।