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शिक्षा
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 29 जुल. 2026, 03:36 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि शिक्षक की डांट आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आती। कोर्ट ने कहा कि जब तक ठोस सबूत न हों, शिक्षक की अनुशासनात्मक कार्रवाई आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं मानी जा सकती।
राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षक की डांट और आत्महत्या के लिए उकसाने के संबंध में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट के अनुसार, शिक्षक की अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें डांट-फटकार भी शामिल है, आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं मानी जा सकती जब तक कि इसके समर्थन में ठोस सबूत न हों। यह फैसला स्कूलों और शिक्षकों के लिए अनुशासन और छात्रों के साथ संबंधों के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण परिणाम ला सकता है। कोर्ट के फैसले से वैध अनुशासनात्मक उपायों और हानिकारक व्यवहार को बढ़ावा देने वाली कार्रवाइयों के बीच अंतर करने का महत्व रेखांकित होता है।