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राजनीति
रजस्थानी उच्च न्यायालय ने गोद लिए बेटे‑ससुर की स्थिति को मान्यता न देने के कारण दयालु नियुक्ति के याचिका को खारिज किया
✍️ Live Law
🗓 12 अग. 2026, 09:22 AM
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रजस्थानी उच्च न्यायालय ने गोद लिए बेटे‑ससुर की स्थिति को मान्यता न देने के कारण दयालु नियुक्ति के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया।
रजस्थानी उच्च न्यायालय ने गोद लिए बेटे‑ससुर के दावे पर दयालु नियुक्ति के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि भारतीय कानून में गोद लिए बेटे‑ससुर की स्थिति को मान्यता नहीं दी गई है, अतः इस आधार पर किसी को भी लाभ या नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि संबंधित व्यक्ति को परिवार में बेटे‑ससुर के रूप में माना जाता है और उसे भी उसी तरह के लाभ मिलने चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून में इस प्रकार के संबंध के लिए कोई प्रावधान नहीं है, और सभी नियुक्तियाँ व लाभ वैध कानूनी संबंधों पर आधारित होने चाहिए।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि भारतीय कानून में गोद लिए बेटे‑ससुर की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है, और दयालु नियुक्तियाँ केवल मान्य पारिवारिक संबंधों के आधार पर ही संभव हैं।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि संबंधित व्यक्ति को परिवार में बेटे‑ससुर के रूप में माना जाता है और उसे भी उसी तरह के लाभ मिलने चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून में इस प्रकार के संबंध के लिए कोई प्रावधान नहीं है, और सभी नियुक्तियाँ व लाभ वैध कानूनी संबंधों पर आधारित होने चाहिए।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि भारतीय कानून में गोद लिए बेटे‑ससुर की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है, और दयालु नियुक्तियाँ केवल मान्य पारिवारिक संबंधों के आधार पर ही संभव हैं।