📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sojat
देश
राजस्थान हाई कोर्ट ने 75 बीघा विरासत भूमि पर पोते के दावे को खारिज किया
✍️ The Economic Times
🗓 09 सित. 2026, 05:48 PM
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राजस्थान हाई कोर्ट ने पोते द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें वह अपने दिवंगत दादा की 75 बीघा जमीन में हिस्सेदारी का दावा कर रहा था, जबकि पिता ने वह जमीन बेच दी थी।
राजस्थान हाई कोर्ट ने बुधवार को एक पोते द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वह अपने दिवंगत दादा की 75 बीघा कृषि भूमि में हिस्सेदारी का दावा कर रहा था। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह जमीन कई पीढ़ियों से परिवार में रही है और उसे पिता ने उसकी सहमति के बिना बेच दिया, जिससे उसका हक़ छीन गया।
कोर्ट ने बताया कि याचिकाकर्ता ने अपने अधिकार को सिद्ध करने के लिये पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं प्रस्तुत किए थे। बिक्री पिता द्वारा की गई थी, जो रजिस्टर्ड मालिक थे, और पोते का दावा केवल मौखिक दावों पर आधारित था।
इस कारण याचिका को निराधार और समयपूर्व माना गया और खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने पोते को सलाह दी कि यदि वह बिक्री को अन्य आधारों पर चुनौती देना चाहता है तो उचित सिविल न्यायालय में मामला दायर करे, और अनावश्यक मुकदमों पर खर्चा लग सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला परिवारिक भूमि लेन‑देनों में स्पष्ट दस्तावेज़ीकरण के महत्व को रेखांकित करता है, खासकर राजस्थान जैसे राज्यों में जहाँ कृषि संपत्ति अक्सर बड़े क्षेत्र में फैली होती है।
कोर्ट ने बताया कि याचिकाकर्ता ने अपने अधिकार को सिद्ध करने के लिये पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं प्रस्तुत किए थे। बिक्री पिता द्वारा की गई थी, जो रजिस्टर्ड मालिक थे, और पोते का दावा केवल मौखिक दावों पर आधारित था।
इस कारण याचिका को निराधार और समयपूर्व माना गया और खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने पोते को सलाह दी कि यदि वह बिक्री को अन्य आधारों पर चुनौती देना चाहता है तो उचित सिविल न्यायालय में मामला दायर करे, और अनावश्यक मुकदमों पर खर्चा लग सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला परिवारिक भूमि लेन‑देनों में स्पष्ट दस्तावेज़ीकरण के महत्व को रेखांकित करता है, खासकर राजस्थान जैसे राज्यों में जहाँ कृषि संपत्ति अक्सर बड़े क्षेत्र में फैली होती है।