📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anil thakur chairman
बिज़नेस
पंजाब के मंत्री सौंद ने एमएसएमई में एआई व ऑटोमेशन अपनाने की अपील की
✍️ Amar Ujala · Ludhiana
🗓 25 सित. 2026, 05:45 PM
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पंजाब के एमएसएमई को प्रतिस्पर्धा के लिए एआई और ऑटोमेशन अपनाने की आवश्यकता है, यह बात मंत्री सौंद ने कही।
लुधियाना, पंजाब – पंजाब के मंत्री सौंद ने कहा कि राज्य के छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और ऑटोमेशन तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि डिजिटल उपकरण उत्पादन को सरल बना सकते हैं, लागत घटा सकते हैं और उन व्यवसायों के लिए नई संभावनाएँ खोल सकते हैं जो पारंपरिक रूप से मैन्युअल प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं।
सौंद ने कहा कि कई एमएसएमई सीमित संसाधनों पर काम करते हैं, फिर भी भविष्यवाणी रखरखाव, इन्वेंटरी अनुकूलन और डेटा विश्लेषण जैसी एआई‑आधारित समाधान अपनाने से दक्षता में काफी सुधार हो सकता है। उन्होंने उद्योग संगठनों और सरकारी एजेंसियों से अनुरोध किया कि वे उन उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन प्रदान करने में सहयोग करें जो अपने संचालन को आधुनिकीकरण करना चाहते हैं।
मंत्री ने राज्य की मौजूदा पहलों का उल्लेख किया, जिनमें तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी और नवाचार केंद्रों की स्थापना शामिल है, जो एमएसएमई के लिए डिजिटल इकोसिस्टम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि एआई और ऑटोमेशन को वैकल्पिक अपग्रेड नहीं, बल्कि भविष्य की स्थिरता के आवश्यक घटक माना जाना चाहिए।
यह अपील राष्ट्रीय स्तर पर निर्मात्री क्षेत्र को डिजिटल बनाने के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाती है, जो भारत के "मेक इन इंडिया" और "डिजिटल इंडिया" कार्यक्रमों के साथ संरेखित है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीघ्र अपनाने से पंजाब के एमएसएमई को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ा हिस्सा मिल सकता है।
आगामी हफ्तों में हितधारकों के बीच कार्यान्वयन रोडमैप, वित्तीय तंत्र और पंजाब के विविध एमएसएमई की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
सौंद ने कहा कि कई एमएसएमई सीमित संसाधनों पर काम करते हैं, फिर भी भविष्यवाणी रखरखाव, इन्वेंटरी अनुकूलन और डेटा विश्लेषण जैसी एआई‑आधारित समाधान अपनाने से दक्षता में काफी सुधार हो सकता है। उन्होंने उद्योग संगठनों और सरकारी एजेंसियों से अनुरोध किया कि वे उन उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन प्रदान करने में सहयोग करें जो अपने संचालन को आधुनिकीकरण करना चाहते हैं।
मंत्री ने राज्य की मौजूदा पहलों का उल्लेख किया, जिनमें तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी और नवाचार केंद्रों की स्थापना शामिल है, जो एमएसएमई के लिए डिजिटल इकोसिस्टम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि एआई और ऑटोमेशन को वैकल्पिक अपग्रेड नहीं, बल्कि भविष्य की स्थिरता के आवश्यक घटक माना जाना चाहिए।
यह अपील राष्ट्रीय स्तर पर निर्मात्री क्षेत्र को डिजिटल बनाने के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाती है, जो भारत के "मेक इन इंडिया" और "डिजिटल इंडिया" कार्यक्रमों के साथ संरेखित है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीघ्र अपनाने से पंजाब के एमएसएमई को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ा हिस्सा मिल सकता है।
आगामी हफ्तों में हितधारकों के बीच कार्यान्वयन रोडमैप, वित्तीय तंत्र और पंजाब के विविध एमएसएमई की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है।