📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Asmit4
स्वास्थ्य
पंजाब हाई कोर्ट ने चेतावनी, 44% कैदी नशे में
✍️ news18.com
🗓 09 सित. 2026, 03:37 AM
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बताया कि राज्य के जेलों में लगभग आधे कैदी नशे के आदी हैं, त्वरित उपायों की मांग की।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हालिया सर्वेक्षण के बाद गंभीर चिंता जताई, जिसमें पता चला कि पंजाब के जेलों में 44% कैदी नशे के आदी हैं। कोर्ट ने इसे "गंभीर स्वास्थ्य संकट" कहा, जो कैदी कल्याण और जेल सुरक्षा दोनों को खतरे में डालता है।
रिपोर्ट के अनुसार, नशे की उच्च दर अपर्याप्त पुनर्वास सुविधाओं और जेलों में अवैध पदार्थों की आसान उपलब्धता से जुड़ी है। न्यायाधीशों ने जेल प्रबंधन को एक महीने के भीतर विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें डि‑ऐडिक्शन कार्यक्रम, नियमित स्वास्थ्य जांच और अवैध पदार्थों पर कड़ी निगरानी शामिल हो।
कोर्ट ने राज्य सरकार से अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने, काउंसलिंग, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रिहाई के बाद समर्थन प्रदान करने का भी आग्रह किया, ताकि नशे से जुड़ी पुनरावृत्ति को रोका जा सके। जेल अधिकारियों को स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर इन उपायों को लागू करने की उम्मीद है।
यदि निर्देशों का समय पर पालन नहीं हुआ, तो हाई कोर्ट आगे की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें अनुपालन की निगरानी के लिए एक निरीक्षण समिति का गठन शामिल है। यह निर्णय भारतीय जेलों में स्वास्थ्य और आपराधिक न्याय के बीच बढ़ती चुनौती को उजागर करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, नशे की उच्च दर अपर्याप्त पुनर्वास सुविधाओं और जेलों में अवैध पदार्थों की आसान उपलब्धता से जुड़ी है। न्यायाधीशों ने जेल प्रबंधन को एक महीने के भीतर विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें डि‑ऐडिक्शन कार्यक्रम, नियमित स्वास्थ्य जांच और अवैध पदार्थों पर कड़ी निगरानी शामिल हो।
कोर्ट ने राज्य सरकार से अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने, काउंसलिंग, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रिहाई के बाद समर्थन प्रदान करने का भी आग्रह किया, ताकि नशे से जुड़ी पुनरावृत्ति को रोका जा सके। जेल अधिकारियों को स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर इन उपायों को लागू करने की उम्मीद है।
यदि निर्देशों का समय पर पालन नहीं हुआ, तो हाई कोर्ट आगे की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें अनुपालन की निगरानी के लिए एक निरीक्षण समिति का गठन शामिल है। यह निर्णय भारतीय जेलों में स्वास्थ्य और आपराधिक न्याय के बीच बढ़ती चुनौती को उजागर करता है।