📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा, पिता को स्वचालित रूप से अभिरक्षा नहीं मिलती
✍️ The Indian Express
🗓 17 सित. 2026, 11:01 AM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि केवल जैविक पिता होना अभिरक्षा का स्वचालित अधिकार नहीं देता, बच्चे के कल्याण को प्राथमिकता दी गई।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि केवल पिता होना अभिरक्षा देने के लिए पर्याप्त नहीं है।\nकोर्ट ने कहा कि अभिरक्षा के निर्णय में बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिसमें बच्चे का माहौल, भावनात्मक जुड़ाव और दोनों अभिभावकों की देखभाल क्षमता जैसे पहलू शामिल हों।\nयह फैसला एक पिता द्वारा एकल अभिरक्षा की मांग के बाद आया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890 के तहत पुनः विचार करने का निर्देश दिया।\nकानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारतीय न्यायिक प्रवृत्ति के अनुरूप है, जो यह दर्शाता है कि लिंग अभिरक्षा का पूर्वनिर्धारित अधिकार नहीं देता।\nइस निर्णय से क्षेत्र में पारिवारिक मामलों में बदलाव की उम्मीद है, जहाँ पक्ष अब लिंग के बजाय बच्चे के कल्याण को आधार बनाकर दलील करेंगे।