📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
अपराध
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा, पैसे से साइबर धोखाधड़ी का मुकदमा नहीं रुक सकता
✍️ The Indian Express
🗓 19 सित. 2026, 06:31 AM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामले में पैसे से मुकदमा नहीं रोका जा सकता, न्याय की अहमियत को दोहराया।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट के बेंच ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामले में कोई भी आर्थिक समझौता मुकदमे को समाप्त नहीं कर सकता। न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अभियोजन प्रक्रिया को जारी रहना चाहिए, चाहे आरोपी या पीड़ित कोई भी समझौता पेश करें।
जजों ने यह रेखांकित किया कि वित्तीय लेन‑देन को आपराधिक मामले के प्रवाह को निर्धारित करने देना न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करेगा और भविष्य के साइबर अपराधों के लिए खतरनाक मिसाल स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय का मुख्य उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि निजी समझौतों को बढ़ावा देना जो सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यह फैसला देश में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी मामलों के बीच आया है, जिससे न्यायालयों ने ऐसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का इरादा जताया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस संदेश को मजबूत करता है कि साइबर अपराधियों को केवल जुर्माना या क्षतिपूर्ति देकर मुकदमे से बचा नहीं जा सकता।
प्राधिकरणों से उम्मीद की जा रही है कि वे मौजूदा आपराधिक कानूनों के तहत जांच और अभियोजन जारी रखें, ताकि पीड़ितों को न्यायिक प्रणाली के माध्यम से उचित राहत मिले, न कि अनौपचारिक वित्तीय समझौतों से।
जजों ने यह रेखांकित किया कि वित्तीय लेन‑देन को आपराधिक मामले के प्रवाह को निर्धारित करने देना न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करेगा और भविष्य के साइबर अपराधों के लिए खतरनाक मिसाल स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय का मुख्य उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि निजी समझौतों को बढ़ावा देना जो सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यह फैसला देश में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी मामलों के बीच आया है, जिससे न्यायालयों ने ऐसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का इरादा जताया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस संदेश को मजबूत करता है कि साइबर अपराधियों को केवल जुर्माना या क्षतिपूर्ति देकर मुकदमे से बचा नहीं जा सकता।
प्राधिकरणों से उम्मीद की जा रही है कि वे मौजूदा आपराधिक कानूनों के तहत जांच और अभियोजन जारी रखें, ताकि पीड़ितों को न्यायिक प्रणाली के माध्यम से उचित राहत मिले, न कि अनौपचारिक वित्तीय समझौतों से।