📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
शिक्षा
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने स्कूलों में लिंग‑आधारित बुलिंग पर त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया
✍️ The Indian Express
🗓 02 नव. 2026, 02:36 PM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने दोनों राज्यों के स्कूलों में लिंग‑आधारित बुलिंग रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने का निर्देश दिया।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट की एक बेंच ने आज स्कूलों में लिंग‑आधारित बुलिंग के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया। कोर्ट ने छात्रों के लिंग के आधार पर बढ़ते उत्पीड़न की रिपोर्टों को उजागर किया और कहा कि यह व्यवहार सुरक्षित शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाता है।
आदेश में दोनों राज्यों के शिक्षा विभागों को एक महीने के भीतर स्पष्ट एंटी‑बुलिंग नीतियां तैयार करने और लागू करने का निर्देश दिया गया है। इन नीतियों में शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, पीड़ितों के लिए शिकायत निवारण तंत्र और स्कूलों के व्यवहार की नियमित निगरानी शामिल होगी।
पंजाब और हरियाणा के शिक्षा मंत्रालयों ने आदेश को स्वीकार किया है और कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी स्कूलों को आवश्यक नीति ढांचा भेजा जाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शिक्षकों और काउंसलरों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को भारतीय स्कूलों में लिंग‑आधारित उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा को संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाता है।
आदेश में दोनों राज्यों के शिक्षा विभागों को एक महीने के भीतर स्पष्ट एंटी‑बुलिंग नीतियां तैयार करने और लागू करने का निर्देश दिया गया है। इन नीतियों में शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, पीड़ितों के लिए शिकायत निवारण तंत्र और स्कूलों के व्यवहार की नियमित निगरानी शामिल होगी।
पंजाब और हरियाणा के शिक्षा मंत्रालयों ने आदेश को स्वीकार किया है और कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी स्कूलों को आवश्यक नीति ढांचा भेजा जाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शिक्षकों और काउंसलरों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को भारतीय स्कूलों में लिंग‑आधारित उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा को संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाता है।