📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
राजनीति
पंजाब‑हरियाणा HC ने MCG के तहत कॉलोनीज़ पर DTCP की अधिकारिता को बरकरार रखा
✍️ Hindustan Times
🗓 25 सित. 2026, 11:02 AM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने निर्णय दिया कि विकास एवं टाउन प्लानिंग प्राधिकरण को मास्टर प्लान के तहत कॉलोनीज़ पर अपना अधिकार बरकरार रहेगा, इसके अधिकारों को चुनौती देने वाले दावों को खारिज किया गया।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने विकास एवं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTCP) विभाग को मास्टर प्लान (MCG) के तहत आने वाली कॉलोनीज़ पर अपना अधिकार बरकरार रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जो DTCP की नियामक शक्ति को सीमित करने की मांग करती थीं, यह कहते हुए कि मौजूदा कानूनी ढांचा स्पष्ट रूप से इस प्राधिकरण को ऐसे क्षेत्रों में योजना और विकास की देखरेख करने का अधिकार देता है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि DTCP की निगरानी अन्य स्थानीय शासकीय निकायों के साथ टकराव में है, परंतु न्यायालय ने कहा कि भूमि उपयोग नियंत्रण का मुख्य साधन मास्टर प्लान ही है। इसलिए, योजना में किसी भी बदलाव के लिए DTCP की मंजूरी अनिवार्य है, और इस फैसले ने इस प्रक्रिया को सुदृढ़ किया है।
यह निर्णय क्षेत्र में चल रहे और भविष्य के विकास परियोजनाओं को प्रभावित करेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि कॉलोनी लेआउट, निर्माण अनुमति और बुनियादी ढाँचा सुधार के लिए DTCP की स्वीकृति आवश्यक बनी रहे। हितधारकों को इस आदेश का पालन करने और कानूनी जटिलताओं से बचने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पंजाब और हरियाणा में योजना प्राधिकरणों के बीच अधिकारिक क्रम को स्पष्ट करता है, जिससे नगरपालिका निकायों और DTCP के बीच अधिकारिक विवाद कम हो सकते हैं। कोर्ट ने DTCP को बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के अपनी निगरानी कार्य जारी रखने का निर्देश भी दिया।
यह राय न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करती है, जो नियामक योजना तंत्र को सुदृढ़ करके शहरी विकास को व्यवस्थित करने और प्रभावित निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने का लक्ष्य रखती है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि DTCP की निगरानी अन्य स्थानीय शासकीय निकायों के साथ टकराव में है, परंतु न्यायालय ने कहा कि भूमि उपयोग नियंत्रण का मुख्य साधन मास्टर प्लान ही है। इसलिए, योजना में किसी भी बदलाव के लिए DTCP की मंजूरी अनिवार्य है, और इस फैसले ने इस प्रक्रिया को सुदृढ़ किया है।
यह निर्णय क्षेत्र में चल रहे और भविष्य के विकास परियोजनाओं को प्रभावित करेगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि कॉलोनी लेआउट, निर्माण अनुमति और बुनियादी ढाँचा सुधार के लिए DTCP की स्वीकृति आवश्यक बनी रहे। हितधारकों को इस आदेश का पालन करने और कानूनी जटिलताओं से बचने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पंजाब और हरियाणा में योजना प्राधिकरणों के बीच अधिकारिक क्रम को स्पष्ट करता है, जिससे नगरपालिका निकायों और DTCP के बीच अधिकारिक विवाद कम हो सकते हैं। कोर्ट ने DTCP को बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के अपनी निगरानी कार्य जारी रखने का निर्देश भी दिया।
यह राय न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करती है, जो नियामक योजना तंत्र को सुदृढ़ करके शहरी विकास को व्यवस्थित करने और प्रभावित निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने का लक्ष्य रखती है।