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पंजाब सरकार ने केंद्र‑समान डीए का ऑफर, 14,191 करोड़ के बकाया भुगतान के लिए लिक्विडेशन योजना
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 03 सित. 2026, 09:32 PM
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पंजाब सरकार ने छठे वेतन आयोग के तहत लगभग 14,191 करोड़ रुपये के बकाया डीए‑डीआर को केंद्र के बराबर दरों पर चुकाने के लिए लिक्विडेशन योजना तैयार की है।
पंजाब की वित्त विभाग ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए देय देयरनेस अलाउंस (डीए) और देयरनेस रिलीफ़ (डीआर) के बकाया को निपटाने हेतु एक विस्तृत लिक्विडेशन योजना का खुलासा किया है। यह योजना छठे वेतन आयोग के तहत लगभग 14,191 करोड़ रुपये के बकाया को समाप्त करने पर केंद्रित है।
प्रस्ताव के अनुसार, राज्य अपने डीए की दरों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दरों के बराबर करेगा, जिससे कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान और मुकदमों में कमी आएगी। लिक्विडेशन शेड्यूल में चरणबद्ध भुगतान का प्रावधान है, जिसमें पेंशनभोगियों और वरिष्ठ कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिल चुकी है और इसे बजट पुनः आवंटन तथा अल्पकालिक उधारी के संयोजन से वित्त पोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक बार का निपटान है और भविष्य में केंद्रीय मानक से अधिक वृद्धि नहीं होगी।
यह घोषणा कर्मचारियों के संघों के साथ लंबे समय तक चलती बातचीत के बाद आई है, जिन्होंने केंद्र‑समान डीए की माँग की थी। सरकार आशा करती है कि यह प्रस्ताव विरोध समाप्त कर देगा, जबकि संघों ने प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई रोकने का संकेत दिया है।
प्रस्ताव के अनुसार, राज्य अपने डीए की दरों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दरों के बराबर करेगा, जिससे कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान और मुकदमों में कमी आएगी। लिक्विडेशन शेड्यूल में चरणबद्ध भुगतान का प्रावधान है, जिसमें पेंशनभोगियों और वरिष्ठ कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिल चुकी है और इसे बजट पुनः आवंटन तथा अल्पकालिक उधारी के संयोजन से वित्त पोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक बार का निपटान है और भविष्य में केंद्रीय मानक से अधिक वृद्धि नहीं होगी।
यह घोषणा कर्मचारियों के संघों के साथ लंबे समय तक चलती बातचीत के बाद आई है, जिन्होंने केंद्र‑समान डीए की माँग की थी। सरकार आशा करती है कि यह प्रस्ताव विरोध समाप्त कर देगा, जबकि संघों ने प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई रोकने का संकेत दिया है।