📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
नौकरी
पंजाब सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन में कटौती, 360 करोड़ की देनदारी बताई, वास्तविक खर्च 4.4 करोड़
✍️ Hindustan Times
🗓 06 अक्टू. 2026, 01:46 AM
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पंजाब सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन घटाने का फैसला किया, 360 करोड़ की देनदारी का हवाला दिया, लेकिन ऑडिट में वास्तविक खर्च केवल 4.4 करोड़ बताया गया।
पंजाब राज्य सरकार ने अपने वेतनभोगी कर्मचारियों की पेंशन में कटौती करने का आदेश जारी किया, यह बताते हुए कि लगभग 360 करोड़ रुपये की देनदारी को कम करना आवश्यक है। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम राज्य की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
परंतु, राज्य के वित्त विभाग द्वारा किए गए हालिया ऑडिट में यह पाया गया कि पेंशन योजना का वास्तविक खर्च केवल लगभग 4.4 करोड़ रुपये है। ऑडिट ने सरकार द्वारा बताई गई देनदारी की मात्रा पर सवाल उठाया और कहा कि इस कटौती का वास्तविक वित्तीय बोझ के मुकाबले अनुपात अधिक हो सकता है।
कर्मचारी संघों ने इस अचानक कटौती पर चिंता जताई है, यह कहते हुए कि यह हजारों पेंशनभोगियों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है। राज्य सरकार ने कहा है कि ऑडिट के परिणामों को देखते हुए निर्णय की पुनः समीक्षा की जाएगी, परंतु पेंशन संरचना में आगे की कोई भी बदलाव को अभी समाप्त नहीं माना गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला कई भारतीय राज्यों को पेंशन प्रतिबद्धताओं और सीमित राजस्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाता है। पंजाब सरकार की आगामी विधानसभा सत्र में विस्तृत लागत‑लाभ विश्लेषण प्रस्तुत करने की उम्मीद है।
परंतु, राज्य के वित्त विभाग द्वारा किए गए हालिया ऑडिट में यह पाया गया कि पेंशन योजना का वास्तविक खर्च केवल लगभग 4.4 करोड़ रुपये है। ऑडिट ने सरकार द्वारा बताई गई देनदारी की मात्रा पर सवाल उठाया और कहा कि इस कटौती का वास्तविक वित्तीय बोझ के मुकाबले अनुपात अधिक हो सकता है।
कर्मचारी संघों ने इस अचानक कटौती पर चिंता जताई है, यह कहते हुए कि यह हजारों पेंशनभोगियों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है। राज्य सरकार ने कहा है कि ऑडिट के परिणामों को देखते हुए निर्णय की पुनः समीक्षा की जाएगी, परंतु पेंशन संरचना में आगे की कोई भी बदलाव को अभी समाप्त नहीं माना गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला कई भारतीय राज्यों को पेंशन प्रतिबद्धताओं और सीमित राजस्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाता है। पंजाब सरकार की आगामी विधानसभा सत्र में विस्तृत लागत‑लाभ विश्लेषण प्रस्तुत करने की उम्मीद है।