📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ঈশান জ্যোতি বৰা
राजनीति
आरण्याचल प्रदेश में सियांग नदी के मेगा बाँध को लेकर तनाव बढ़ा
✍️ guwahati Plus News
🗓 29 अक्टू. 2026, 03:11 AM
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सियांग नदी पर मेगा बाँध के प्रस्ताव ने आरण्याचल प्रदेश में राजनीतिक व स्थानीय विरोध को जन्म दिया है, जिससे विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।
आरण्याचल प्रदेश सरकार ने सियांग नदी पर एक मेगा जलविद्युत बाँध बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जिसे क्षेत्रीय विद्युत उत्पादन बढ़ाने के लिए बताया गया है। इस परियोजना से कई सौ मेगावॉट की शक्ति उत्पन्न होने की उम्मीद है।
स्थानीय जनसमुदाय, पर्यावरणीय संगठनों और विरोधी राजनेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताया है, क्योंकि वे मानते हैं कि बाँध से बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र डूब सकते हैं, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में बाधा आएगी और नदी किनारे बसे गाँवों को स्थानांतरित होना पड़ेगा। साथ ही, वे आशंका जताते हैं कि इससे असम में नीचे बहने वाले जल प्रवाह पर भी असर पड़ेगा।
यह विवाद राजनीतिक टकराव में बदल गया है, राज्य के विधायकों ने विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और प्रभावित पक्षों से व्यापक परामर्श की मांग की है। केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी की पुनः समीक्षा करने को कहा गया है।
राज्य यह तर्क देता है कि बाँध से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी, जबकि विरोधी पक्ष का कहना है कि वैकल्पिक नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस विवाद का समाधान अभी तक नहीं निकला है, दोनों पक्ष आगे की बातचीत और संभावित कानूनी कदमों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सियांग नदी, जिसे स्थानीय तौर पर दिहांग कहा जाता है, क्षेत्र के स्वदेशी जनजातियों के लिए सांस्कृतिक महत्व रखती है, जिससे इस बहस में सामाजिक‑सांस्कृतिक पहलू भी जुड़ गया है।
स्थानीय जनसमुदाय, पर्यावरणीय संगठनों और विरोधी राजनेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताया है, क्योंकि वे मानते हैं कि बाँध से बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र डूब सकते हैं, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में बाधा आएगी और नदी किनारे बसे गाँवों को स्थानांतरित होना पड़ेगा। साथ ही, वे आशंका जताते हैं कि इससे असम में नीचे बहने वाले जल प्रवाह पर भी असर पड़ेगा।
यह विवाद राजनीतिक टकराव में बदल गया है, राज्य के विधायकों ने विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और प्रभावित पक्षों से व्यापक परामर्श की मांग की है। केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी की पुनः समीक्षा करने को कहा गया है।
राज्य यह तर्क देता है कि बाँध से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी, जबकि विरोधी पक्ष का कहना है कि वैकल्पिक नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस विवाद का समाधान अभी तक नहीं निकला है, दोनों पक्ष आगे की बातचीत और संभावित कानूनी कदमों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सियांग नदी, जिसे स्थानीय तौर पर दिहांग कहा जाता है, क्षेत्र के स्वदेशी जनजातियों के लिए सांस्कृतिक महत्व रखती है, जिससे इस बहस में सामाजिक‑सांस्कृतिक पहलू भी जुड़ गया है।