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प्रॉबेशनर को भी RPwD अधिनियम के तहत कर्मचारी माना गया, विकलांगता के कारण बर्खास्तगी अवैध
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
नौकरी

प्रॉबेशनर को भी RPwD अधिनियम के तहत कर्मचारी माना गया, विकलांगता के कारण बर्खास्तगी अवैध

✍️ Live Law 🗓 04 अग. 2026, 01:03 PM 👁 29
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हाल ही में एक निर्णय ने कहा कि प्रॉबेशनर को RPwD अधिनियम के तहत कर्मचारी माना जाता है, जिससे उन्हें प्रॉबेशन के दौरान विकलांगता होने पर बर्खास्तगी से बचाया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि प्रॉबेशन पर रहने वाले कर्मचारियों को भी RPwD अधिनियम के तहत कर्मचारी माना जाता है। इस निर्णय के अनुसार, प्रॉबेशन के दौरान विकलांगता होने पर केवल उसी कारण से बर्खास्तगी अवैध है।

RPwD अधिनियम के अंतर्गत नियोक्ताओं को विकलांग व्यक्तियों को उचित सुविधा देने और भेदभाव न करने का दायित्व है। प्रॉबेशनर पर यह सुरक्षा लागू करने से नए कर्मचारियों को नौकरी के दौरान उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के कारण नुकसान नहीं पहुँचता।

यह निर्णय एक समूह के विकलांग कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका के बाद आया, जिन्होंने तर्क दिया कि प्रॉबेशन स्थिति नियोक्ता को उनके कानूनी दायित्व से मुक्त नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने यह सिद्ध किया कि रोजगार के अधिकार नौकरी के क्षण से लागू होते हैं।

नियोक्ताओं को अपनी प्रॉबेशन नीतियों की समीक्षा करने और RPwD अधिनियम के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है। ऐसा न करने पर कानूनी चुनौतियाँ और मुआवजा दावे हो सकते हैं।

यह निर्णय पूरे देश में HR प्रथाओं को प्रभावित करने की उम्मीद है, जिससे कंपनियाँ अधिक समावेशी ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाएँ अपनाएँगी।
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