📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Digital Sansad
राजनीति
प्रियंका चतुर्वेदी ने राम रहीम को बार‑बार पैरोल देने पर सवाल उठाए
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 26 अग. 2026, 01:19 PM
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सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राम रहीम को बार‑बार पैरोल मिलने पर न्याय व्यवस्था की आलोचना की, कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राम रहीम सिंह, जो डेरा सचा सौदा के पूर्व प्रमुख हैं और हत्या‑बलात्कार के मामलों में आजीवन कारावास की सजा का सामना कर रहे हैं, को बार‑बार पैरोल मिलने को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह बार‑बार रिहाई न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और पीड़ितों के अधिकारों को कमजोर करती है।
चतुर्वेदी ने जेल प्राधिकरणों द्वारा उच्च‑प्रोफ़ाइल अपराधियों को पैरोल देने में पारदर्शिता और मानदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि मौजूदा पैरोल ढाँचे की समीक्षा करके इसे दोहराव वाले अपराधियों के लिए एक छिद्र न बनने दिया जाए।
इन टिप्पणियों ने विधायकों और नागरिक समाज के समूहों के बीच व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जो गंभीर अपराधों में पैरोल निर्णयों की कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा आपराधिक न्याय सुधारों पर आगामी संसद चर्चा में प्रमुख रूप से उठने की संभावना है।
पीड़ित अधिकार संगठनों ने भी कानून के समानुपातिक अनुप्रयोग की आवश्यकता दोहराई, यह चेतावनी देते हुए कि नरम पैरोल प्रथा खतरनाक मिसाल स्थापित कर सकती है।
इस विवाद ने न्याय मंत्रालय पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करे और सजा पाई अपराधियों के लिए पैरोल नियमों को कड़ा करने पर विचार करे।
चतुर्वेदी ने जेल प्राधिकरणों द्वारा उच्च‑प्रोफ़ाइल अपराधियों को पैरोल देने में पारदर्शिता और मानदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि मौजूदा पैरोल ढाँचे की समीक्षा करके इसे दोहराव वाले अपराधियों के लिए एक छिद्र न बनने दिया जाए।
इन टिप्पणियों ने विधायकों और नागरिक समाज के समूहों के बीच व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जो गंभीर अपराधों में पैरोल निर्णयों की कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा आपराधिक न्याय सुधारों पर आगामी संसद चर्चा में प्रमुख रूप से उठने की संभावना है।
पीड़ित अधिकार संगठनों ने भी कानून के समानुपातिक अनुप्रयोग की आवश्यकता दोहराई, यह चेतावनी देते हुए कि नरम पैरोल प्रथा खतरनाक मिसाल स्थापित कर सकती है।
इस विवाद ने न्याय मंत्रालय पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करे और सजा पाई अपराधियों के लिए पैरोल नियमों को कड़ा करने पर विचार करे।