📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Home Affairs
धर्म
प्रमोद संगही ने कहा: पौराणिक कथाओं में अभी भी कई अनछुए पहलू बचे हैं
✍️ Deccan Chronicle
🗓 04 नव. 2026, 04:03 AM
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एक हालिया साक्षात्कार में प्रमोद संगही ने कहा कि भारतीय पौराणिक कथाओं में अभी भी कई अनछुए पहलू हैं, जिनकी गहन खोज और रचनात्मक उपयोग की आवश्यकता है।
प्रमोद संगही ने देक्कन क्रॉनिकल को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारतीय पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह अभी भी पूरी तरह से खोजा नहीं गया है। उन्होंने बताया कि कई कहानियां प्रसिद्ध हैं, पर कई पात्र, घटनाएँ और क्षेत्रीय विविधताएँ अभी भी विद्वानों और रचनाकारों की खोज का इंतजार कर रही हैं।
वह यह सुझाव देते हैं कि समकालीन लेखकों, फिल्म निर्माताओं और शोधकर्ताओं के पास इन कम ज्ञात पहलुओं में गहराई से उतरने का बड़ा अवसर है, जिससे सांस्कृतिक संवाद समृद्ध होगा और विरासत सुरक्षित रहेगी। उन्होंने संस्थानों और मीडिया से इन छिपे हुए कथाओं को उजागर करने वाले प्रोजेक्ट्स को समर्थन देने का आग्रह किया।
संगही के इस बयान का समय ऐसा है जब साहित्य, सिनेमा और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर पौराणिक विषयों में पुनः रुचि बढ़ रही है, जो आधुनिक कहानी कहने में प्राचीन कथाओं की प्रासंगिकता को दर्शाता है।
वह यह सुझाव देते हैं कि समकालीन लेखकों, फिल्म निर्माताओं और शोधकर्ताओं के पास इन कम ज्ञात पहलुओं में गहराई से उतरने का बड़ा अवसर है, जिससे सांस्कृतिक संवाद समृद्ध होगा और विरासत सुरक्षित रहेगी। उन्होंने संस्थानों और मीडिया से इन छिपे हुए कथाओं को उजागर करने वाले प्रोजेक्ट्स को समर्थन देने का आग्रह किया।
संगही के इस बयान का समय ऐसा है जब साहित्य, सिनेमा और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर पौराणिक विषयों में पुनः रुचि बढ़ रही है, जो आधुनिक कहानी कहने में प्राचीन कथाओं की प्रासंगिकता को दर्शाता है।