📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / KennyOMG
मनोरंजन
पूनम गुप्ता ने कहा कि श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल जेके महिलाओं के लिए नए अवसर खोल सकता है
✍️ Greater Kashmir
🗓 10 सित. 2026, 08:39 AM
👁 21
पूनम गुप्ता ने कहा कि श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल जम्मू और कश्मीर की महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। उनकी टिप्पणी ग्रेटर कश्मीर में प्रकाशित हुई।
पूनम गुप्ता, श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल के संबंध में बोलते हुए, इस घटना के जम्मू और कश्मीर की महिलाओं को लाभ पहुंचाने की क्षमता को उजागर किया। उन्होंने कहा कि फेस्टिवल महिला प्रतिभा को प्रदर्शित करने और सिनेमा तथा संबंधित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक मंच साबित हो सकता है।
गुप्ता ने आगे कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक प्रयास पारंपरिक बाधाओं को तोड़ने में मदद कर सकते हैं और कौशल विकास तथा रोजगार के नए रास्ते खोल सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि फेस्टिवल का समावेशी माहौल अधिक महिलाओं को रचनात्मक करियर चुनने के लिए प्रेरित कर सकता है।
उनकी टिप्पणी ग्रेटर कश्मीर में प्रकाशित हुई, जिसने फेस्टिवल के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा को बढ़ावा देना और समावेशिता को बढ़ावा देना है। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजन क्षेत्र के भीतर और बाहर के फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाने का प्रयास करता है।
समग्र रूप से, इस बयान से संकेत मिलता है कि श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल जम्मू और कश्मीर के सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों में लिंग भागीदारी को बढ़ाने का एक उत्प्रेरक बन सकता है।
गुप्ता ने आगे कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक प्रयास पारंपरिक बाधाओं को तोड़ने में मदद कर सकते हैं और कौशल विकास तथा रोजगार के नए रास्ते खोल सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि फेस्टिवल का समावेशी माहौल अधिक महिलाओं को रचनात्मक करियर चुनने के लिए प्रेरित कर सकता है।
उनकी टिप्पणी ग्रेटर कश्मीर में प्रकाशित हुई, जिसने फेस्टिवल के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा को बढ़ावा देना और समावेशिता को बढ़ावा देना है। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजन क्षेत्र के भीतर और बाहर के फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाने का प्रयास करता है।
समग्र रूप से, इस बयान से संकेत मिलता है कि श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल जम्मू और कश्मीर के सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों में लिंग भागीदारी को बढ़ाने का एक उत्प्रेरक बन सकता है।