📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Peter23
बिज़नेस
0.4% यूपीआई लेन‑देन शुल्क पर राजनीतिक टकराव, उद्योग ने दिया विरोध
✍️ India Today
🗓 17 सित. 2026, 07:16 AM
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सरकार के 0.4% यूपीआई व्यापारी शुल्क प्रस्ताव पर राजनीतिक टकराव, उद्योग ने इसे आवश्यक बताया
नई दिल्ली – सरकार द्वारा यूपीआई (यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस) का उपयोग करने वाले व्यापारियों पर 0.4% शुल्क लगाने के प्रस्ताव को लेकर संसद में तीव्र बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह शुल्क छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए लेन‑देन लागत बढ़ा देगा, जबकि सत्ताधारी गठबंधन का तर्क है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को स्थायी बनाने के लिए यह आवश्यक है।
राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और प्रमुख फिनटेक संघों सहित उद्योग प्रतिनिधियों ने इस शुल्क का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह मामूली प्रतिशत संचालन खर्च, सुरक्षा उन्नयन और यूपीआई प्लेटफ़ॉर्म की दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में मदद करेगा, जो रोज़ाना अरबों रुपये का लेन‑देन संभालता है।
वित्त मंत्रालय के आगामी बजट सत्र में विस्तृत संशोधन पेश करने की तैयारी के साथ यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है। हितधारक एक संतुलित समाधान की मांग कर रहे हैं जो डिजिटल भुगतान की किफ़ायती को बनाए रखे और बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचाए।
विश्लेषकों का कहना है कि शुल्क संरचना में कोई देरी या बदलाव भुगतान सेवा प्रदाताओं के राजस्व मॉडल को प्रभावित कर सकता है और क्षेत्र में नवाचार की गति को धीमा कर सकता है। इस टकराव का परिणाम भारत की तेज़ी से बढ़ती फिनटेक उद्योग के भविष्य के नियामक कदमों के लिए एक मिसाल स्थापित करेगा।
राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और प्रमुख फिनटेक संघों सहित उद्योग प्रतिनिधियों ने इस शुल्क का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह मामूली प्रतिशत संचालन खर्च, सुरक्षा उन्नयन और यूपीआई प्लेटफ़ॉर्म की दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में मदद करेगा, जो रोज़ाना अरबों रुपये का लेन‑देन संभालता है।
वित्त मंत्रालय के आगामी बजट सत्र में विस्तृत संशोधन पेश करने की तैयारी के साथ यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है। हितधारक एक संतुलित समाधान की मांग कर रहे हैं जो डिजिटल भुगतान की किफ़ायती को बनाए रखे और बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचाए।
विश्लेषकों का कहना है कि शुल्क संरचना में कोई देरी या बदलाव भुगतान सेवा प्रदाताओं के राजस्व मॉडल को प्रभावित कर सकता है और क्षेत्र में नवाचार की गति को धीमा कर सकता है। इस टकराव का परिणाम भारत की तेज़ी से बढ़ती फिनटेक उद्योग के भविष्य के नियामक कदमों के लिए एक मिसाल स्थापित करेगा।