📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
अपराध
पटना हाईकोर्ट ने बिहार टेंडर घोटाले में ईडी-एसवीयू जांच की की कड़ी निंदा
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 18 अक्टू. 2026, 06:45 PM
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पटना हाईकोर्ट ने बिहार में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले की जांच पर ईडी और विशेष निगरानी इकाई की आलोचना की, कहा कि कुछ अधिकारियों को बचाने, कुछ को फंसाने की कोशिश दिख रही है।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले की जांच में भाग ले रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की कार्यवाही को खुले तौर पर चुनौती दी है। कोर्ट ने कहा कि जांच का ढांचा ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ अधिकारियों को बचाया जा रहा है, जबकि अन्य को फँसाया जा रहा है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
यह टिप्पणी तब आई है जब टेंडर में irregularities को लेकर सार्वजनिक जांच तेज़ हो रही थी और केंद्रीय एजेंसियों ने हस्तक्षेप किया था। ईडी और एसवीयू ने अभी तक विस्तृत निष्कर्ष नहीं बताए हैं, पर न्यायालय की हस्तक्षेप से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की आलोचना एजेंसियों को अपनी जांच पद्धति का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर सकती है, ताकि प्रक्रिया उचित रहे और किसी भी प्रकार के दबाव से बचा जा सके।
कोर्ट के बयान में अधिकारियों के नाम या वित्तीय आंकड़ों का उल्लेख नहीं किया गया, और एजेंसियों ने अभी तक इस टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह विकास राज्य में खरीद प्रक्रियाओं की निरंतर जांच में एक नया मोड़ जोड़ता है, और जांच एजेंसियों की निगरानी में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है।
यह टिप्पणी तब आई है जब टेंडर में irregularities को लेकर सार्वजनिक जांच तेज़ हो रही थी और केंद्रीय एजेंसियों ने हस्तक्षेप किया था। ईडी और एसवीयू ने अभी तक विस्तृत निष्कर्ष नहीं बताए हैं, पर न्यायालय की हस्तक्षेप से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की आलोचना एजेंसियों को अपनी जांच पद्धति का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर सकती है, ताकि प्रक्रिया उचित रहे और किसी भी प्रकार के दबाव से बचा जा सके।
कोर्ट के बयान में अधिकारियों के नाम या वित्तीय आंकड़ों का उल्लेख नहीं किया गया, और एजेंसियों ने अभी तक इस टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह विकास राज्य में खरीद प्रक्रियाओं की निरंतर जांच में एक नया मोड़ जोड़ता है, और जांच एजेंसियों की निगरानी में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है।