📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
देश
पटना हाईकोर्ट: ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट शराब पीकर गाड़ी चलाने का एकमात्र सबूत नहीं
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 27 जून 2026, 10:00 PM
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पटना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट अकेले शराब पीकर गाड़ी चलाने के दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने निर्णायक सबूत के लिए रक्त या मूत्र परीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
पटना उच्च न्यायालय ने बिहार में शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों में सजा के लिए आवश्यक साक्ष्य के संबंध में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर (सांस की जांच) का परिणाम ही शराब पीने का निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता।
उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, केवल सांस विश्लेषक उपकरण की रीडिंग के आधार पर किसी व्यक्ति को नशे में गाड़ी चलाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में दोषसिद्धि के लिए रक्त या मूत्र परीक्षण जैसे अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता होती है।
यह निर्णय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर प्रकाश डालता है और शराब पीकर गाड़ी चलाने से संबंधित कानूनी कार्यवाही में व्यापक वैज्ञानिक साक्ष्य के महत्व को रेखांकित करता है।
उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, केवल सांस विश्लेषक उपकरण की रीडिंग के आधार पर किसी व्यक्ति को नशे में गाड़ी चलाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में दोषसिद्धि के लिए रक्त या मूत्र परीक्षण जैसे अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता होती है।
यह निर्णय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर प्रकाश डालता है और शराब पीकर गाड़ी चलाने से संबंधित कानूनी कार्यवाही में व्यापक वैज्ञानिक साक्ष्य के महत्व को रेखांकित करता है।