📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
राजनीति
पटना हाई कोर्ट ने कहा: पंचायत राज अधिनियम ही लागू, बिहार आरक्षण अधिनियम नहीं
✍️ Live Law
🗓 24 अग. 2026, 02:18 PM
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पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुखिया चुनावों में आरक्षण का प्रावधान पंचायत राज अधिनियम के तहत है, बिहार आरक्षण अधिनियम नहीं।
पटना हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मुखिया चुनावों में आरक्षण का प्रावधान पंचायत राज अधिनियम के तहत है, न कि बिहार आरक्षण अधिनियम के।
कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण का प्रतिशत स्पष्ट रूप से निर्धारित है, जबकि बिहार आरक्षण अधिनियम राज्य सरकार की सेवाओं में आरक्षण से संबंधित है और पंचायत चुनावों पर लागू नहीं होता।
इसलिए न्यायालय ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बिहार भर में आगामी मुखिया चुनावों में पंचायत राज अधिनियम में निर्धारित आरक्षण मानदंडों को लागू करें, जिससे संवैधानिक नियमों का पालन सुनिश्चित हो।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन भ्रमों को दूर करता है, जहाँ कुछ स्थानीय निकायों ने मुखिया सीटों के लिए बिहार आरक्षण अधिनियम को लागू करने की कोशिश की थी, और यह राज्य के आरक्षण कानून और स्थानीय स्वशासन कानूनों के बीच की विधिक क्रमबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
यह आदेश अगले साल निर्धारित होने वाले पंचायत चुनावों से पहले लागू किया जाएगा, और राज्य चुनाव आयोग को अपने दिशानिर्देशों में आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण का प्रतिशत स्पष्ट रूप से निर्धारित है, जबकि बिहार आरक्षण अधिनियम राज्य सरकार की सेवाओं में आरक्षण से संबंधित है और पंचायत चुनावों पर लागू नहीं होता।
इसलिए न्यायालय ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बिहार भर में आगामी मुखिया चुनावों में पंचायत राज अधिनियम में निर्धारित आरक्षण मानदंडों को लागू करें, जिससे संवैधानिक नियमों का पालन सुनिश्चित हो।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन भ्रमों को दूर करता है, जहाँ कुछ स्थानीय निकायों ने मुखिया सीटों के लिए बिहार आरक्षण अधिनियम को लागू करने की कोशिश की थी, और यह राज्य के आरक्षण कानून और स्थानीय स्वशासन कानूनों के बीच की विधिक क्रमबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
यह आदेश अगले साल निर्धारित होने वाले पंचायत चुनावों से पहले लागू किया जाएगा, और राज्य चुनाव आयोग को अपने दिशानिर्देशों में आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया गया है।