📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
मौसम
पटियाला की हवा में जहरीला धुआँ, पराली जलाने से क्वालिटी गिर गई
✍️ Amar Ujala · Amritsar
🗓 06 नव. 2026, 09:05 AM
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पंजाब में पराली जलाने के कारण पटियाला की हवा सबसे खराब श्रेणी में पहुँच गई, जिससे लोगों की सेहत को खतरा है।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि के कारण वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। पटियाला में राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक ने हवा को सबसे ख़तरनाक श्रेणी में वर्गीकृत किया है, जिससे स्वस्थ लोगों को भी स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
फ़सल के अवशेष जलाने से उत्पन्न घना धुआँ शहर में फैल गया है, जिससे दृश्यता घट गई है और स्वास्थ्य विभाग ने विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को बाहर की गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।
राज्य सरकार ने यांत्रिक अवशेष हटाने के लिए सब्सिडी जैसी उपायों की घोषणा की है, परंतु वर्तमान में धुएँ का असर स्पष्ट है। पर्यावरण एजेंसियां प्रदूषक स्तरों की निरंतर निगरानी कर रही हैं और स्थिति में बदलाव के अनुसार जनता को अपडेट करती रहेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य दीर्घकालिक रोगों में वृद्धि हो सकती है, जिससे इस मौसमी जलाने को रोकने के लिए त्वरित और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
पटियाला की स्थिति पंजाब के कई अन्य शहरों में देखी जा रही खराब वायु गुणवत्ता की व्यापक समस्या को दर्शाती है, जो सतत कृषि प्रथाओं के अपनाने की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर करती है।
फ़सल के अवशेष जलाने से उत्पन्न घना धुआँ शहर में फैल गया है, जिससे दृश्यता घट गई है और स्वास्थ्य विभाग ने विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को बाहर की गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।
राज्य सरकार ने यांत्रिक अवशेष हटाने के लिए सब्सिडी जैसी उपायों की घोषणा की है, परंतु वर्तमान में धुएँ का असर स्पष्ट है। पर्यावरण एजेंसियां प्रदूषक स्तरों की निरंतर निगरानी कर रही हैं और स्थिति में बदलाव के अनुसार जनता को अपडेट करती रहेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य दीर्घकालिक रोगों में वृद्धि हो सकती है, जिससे इस मौसमी जलाने को रोकने के लिए त्वरित और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
पटियाला की स्थिति पंजाब के कई अन्य शहरों में देखी जा रही खराब वायु गुणवत्ता की व्यापक समस्या को दर्शाती है, जो सतत कृषि प्रथाओं के अपनाने की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर करती है।