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पटना में किशोरों के प्रति संवेदनशील पुलिस प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
बिहार के कमजोर वर्ग प्रभाग और अपराध अनुसंधान विभाग ने चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना में किशोरों के प्रति पुलिस की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
पटना। बिहार के कमजोर वर्ग प्रभाग और अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना एवं यूएनएफपीए बिहार के सहयोग से बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय था "Adolescents at the Intersection of Gender and Vulnerability: Strengthening Frontline Responses"। इस प्रमुख कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती हरप्रीत कौर, पुलिस उप महानिरीक्षक, विशेष शाखा, बिहार की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यशाला में कई प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें ख्वाजा सादत नूर (हेड ऑफ ऑफिस, यूएनएफपीए), श्रीमती आयुषी दुबे (निदेशक, जेंडर रिसोर्स सेंटर), श्रीमती अनुश्री मिश्रा (निदेशक, आंगन ट्रस्ट) और डॉ. विजय कुमार बिमल (सहायक प्राध्यापक) शामिल थे। इसके अलावा, विशेष अपराध के प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक एवं चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर्स भी इस कार्यशाला में शामिल हुए।
इस अवसर पर किशोरावस्था में लैंगिक असमानता, संवेदनशीलता, हिंसा, शोषण तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किशोर एवं किशोरियों के प्रति पुलिस की संवेदनशील, प्रभावी और व्यवहारिक फ्रंटलाइन प्रतिक्रिया को मजबूत करना था।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस पदाधिकारियों को किशोरावस्था, लैंगिक संवेदनशीलता और बाल संरक्षण से संबंधित व्यवहारिक एवं विषयगत जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे संवेदनशील मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
कार्यशाला में कई प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें ख्वाजा सादत नूर (हेड ऑफ ऑफिस, यूएनएफपीए), श्रीमती आयुषी दुबे (निदेशक, जेंडर रिसोर्स सेंटर), श्रीमती अनुश्री मिश्रा (निदेशक, आंगन ट्रस्ट) और डॉ. विजय कुमार बिमल (सहायक प्राध्यापक) शामिल थे। इसके अलावा, विशेष अपराध के प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक एवं चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर्स भी इस कार्यशाला में शामिल हुए।
इस अवसर पर किशोरावस्था में लैंगिक असमानता, संवेदनशीलता, हिंसा, शोषण तथा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किशोर एवं किशोरियों के प्रति पुलिस की संवेदनशील, प्रभावी और व्यवहारिक फ्रंटलाइन प्रतिक्रिया को मजबूत करना था।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस पदाधिकारियों को किशोरावस्था, लैंगिक संवेदनशीलता और बाल संरक्षण से संबंधित व्यवहारिक एवं विषयगत जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे संवेदनशील मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।