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पटना: कोटेदार पर दो बार अंगूठा लगवाने के बाद भी राशन न देने का आरोप, ग्रामीणों ने की जांच की मांग
लखीमपुर खीरी के पटना गांव में ग्रामीणों ने सरकारी कोटेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लाभार्थियों का कहना है कि दो बार अंगूठा लगवाने के बावजूद उन्हें निर्धारित राशन नहीं दिया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लखीमपुर खीरी जिले की नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत पटना में सरकारी राशन वितरण को लेकर कोटेदार पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कोटेदार कमलेश लाभार्थियों से राशन देने से पहले दो-दो बार अंगूठा लगवा लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनका हक का अनाज नहीं मिलता। आरोप है कि अंगूठा लगवाने के बाद लाभार्थियों को कई दिनों तक 'आज-कल' कहकर टाल दिया जाता है।
जब ग्रामीण राशन के संबंध में कोटेदार से जवाब मांगते हैं, तो कथित तौर पर यह कहकर बात टाल दी जाती है कि अभी जिले से राशन नहीं आया है। इस कारण गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि राशन वितरण में इस तरह की देरी के कारण उन्हें अपनी रोजमर्रा की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक तंगी उठानी पड़ रही है।
क्षेत्र में आई बाढ़ से पहले से ही परेशान परिवारों के लिए यह स्थिति और भी विकट हो गई है। बाढ़ के कारण कई परिवारों के सामने रोजगार, आवागमन और खाद्यान्न की गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में सरकारी खाद्यान्न योजना के तहत मिलने वाला राशन ही उनके लिए बड़ी राहत का जरिया होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर राशन नहीं मिलता है तो गरीब परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से इस मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, यह भी जांच की जाए कि लाभार्थियों से अंगूठा लगवाने के बाद उन्हें राशन क्यों नहीं दिया जा रहा है और वितरण में देरी का वास्तविक कारण क्या है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी राशन की व्यवस्था में लापरवाही बरती गई तो सरकार की गरीबों के लिए चलाई जा रही अन्न योजनाओं का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। उन्होंने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का पता लगाने और दोषी पाए जाने वाले कोटेदार के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
जब ग्रामीण राशन के संबंध में कोटेदार से जवाब मांगते हैं, तो कथित तौर पर यह कहकर बात टाल दी जाती है कि अभी जिले से राशन नहीं आया है। इस कारण गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि राशन वितरण में इस तरह की देरी के कारण उन्हें अपनी रोजमर्रा की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक तंगी उठानी पड़ रही है।
क्षेत्र में आई बाढ़ से पहले से ही परेशान परिवारों के लिए यह स्थिति और भी विकट हो गई है। बाढ़ के कारण कई परिवारों के सामने रोजगार, आवागमन और खाद्यान्न की गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में सरकारी खाद्यान्न योजना के तहत मिलने वाला राशन ही उनके लिए बड़ी राहत का जरिया होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर राशन नहीं मिलता है तो गरीब परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से इस मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, यह भी जांच की जाए कि लाभार्थियों से अंगूठा लगवाने के बाद उन्हें राशन क्यों नहीं दिया जा रहा है और वितरण में देरी का वास्तविक कारण क्या है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी राशन की व्यवस्था में लापरवाही बरती गई तो सरकार की गरीबों के लिए चलाई जा रही अन्न योजनाओं का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। उन्होंने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का पता लगाने और दोषी पाए जाने वाले कोटेदार के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।