📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
टेक्नोलॉजी
बिहार के नालंदा में पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री ने रोज़ 110 दस्तावेज़ों का डिजिटल निबंधन, क्यूआर कोड से कॉपी मिलेंगी
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 02 नव. 2026, 08:31 AM
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नालंदा जिले में पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है, जहाँ तीन निबंधन कार्यालयों में रोज़ औसतन 110 दस्तावेज़ डिजिटल किए जा रहे हैं, और क्यूआर कोड से तुरंत कॉपी मिल रही है।
बिहार के नालंदा जिले में शुरू किया गया पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री योजना तेज़ी से अपनाई जा रही है। बिहारशरीफ, हिलसा और राजगीर निबंधन कार्यालयों के आंकड़े दर्शाते हैं कि रोज़ औसतन 110 जमीन‑संबंधी दस्तावेज़ डिजिटल रूप में दर्ज किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग से कागज़ी काम खत्म हो गया है, सत्यापन तेज़ हुआ है और दस्तावेज़ों के खोने या छेड़छाड़ की संभावना घट गई है। प्रत्येक डिजिटल प्रविष्टि को एक अनोखा क्यूआर कोड दिया जाता है, जिसे स्कैन करके जमीन मालिक तुरंत अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र की कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।
यह कदम राज्य सरकार की ई‑गवर्नेंस दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि लेन‑देन को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाना है, जहाँ पारंपरिक कागज़ी प्रक्रिया अक्सर देरी का कारण बनती थी।
स्थानीय रियल एस्टेट एजेंटों और किसानों सहित कई हितधारकों ने इस बदलाव का स्वागत किया है, क्योंकि क्यूआर‑कोड आधारित कॉपी प्राप्त करने की सुविधा ऋण आवेदन या पुनर्विक्रय के समय प्रक्रिया को सरल बनाती है।
यह पहल बिहार के डिजिटल परिवर्तन एजेंडा का हिस्सा है, और अधिकारी अन्य जिलों में भी पेपरलेस मॉडल का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग से कागज़ी काम खत्म हो गया है, सत्यापन तेज़ हुआ है और दस्तावेज़ों के खोने या छेड़छाड़ की संभावना घट गई है। प्रत्येक डिजिटल प्रविष्टि को एक अनोखा क्यूआर कोड दिया जाता है, जिसे स्कैन करके जमीन मालिक तुरंत अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र की कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।
यह कदम राज्य सरकार की ई‑गवर्नेंस दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि लेन‑देन को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाना है, जहाँ पारंपरिक कागज़ी प्रक्रिया अक्सर देरी का कारण बनती थी।
स्थानीय रियल एस्टेट एजेंटों और किसानों सहित कई हितधारकों ने इस बदलाव का स्वागत किया है, क्योंकि क्यूआर‑कोड आधारित कॉपी प्राप्त करने की सुविधा ऋण आवेदन या पुनर्विक्रय के समय प्रक्रिया को सरल बनाती है।
यह पहल बिहार के डिजिटल परिवर्तन एजेंडा का हिस्सा है, और अधिकारी अन्य जिलों में भी पेपरलेस मॉडल का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।