📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NaBUru38
स्थानीय
पन्ना‑अजयगढ़ में 51वें दिन जारी आंदोलन, मुआवजा व पुनर्वास की मांग
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 01 नव. 2026, 03:15 PM
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विकास परियोजनाओं से विस्थापित पन्ना‑अजयगढ़ के परिवार 51वें दिन भी चिता आंदोलन जारी रखे, मुआवजा, पुनर्वास और आपराधिक मामलों की वापसी की मांग कर रहे हैं।
पन्ना और अजयगढ़ में शुरू हुआ विरोध अब 51वें दिन पर पहुँच गया है। विभिन्न बुनियादी ढाँचा और खनन परियोजनाओं से विस्थापित हुए परिवारों ने लगातार चिता जलाते हुए अपनी मांगें रखी हैं।
प्रदर्शक उचित आर्थिक मुआवजा, पूर्ण पुनर्वास और उन आपराधिक मामलों की वापसी की माँग कर रहे हैं, जिनके तहत उन्हें पहले के चरणों में केस दर्ज किए गए थे। उनका कहना है कि अब तक दिया गया मुआवजा अपर्याप्त है और कई परिवार अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
नए जिलाधिकारी के साथ हुई हालिया बातचीत के बाद आंदोलन के नेताओं ने प्रशासन के प्रति आशावाद जताया है। जिलाधिकारी ने मुआवजा और पुनर्वास योजनाओं की पुनः समीक्षा करने और लंबित आपराधिक मामलों को रद्द करने का आश्वासन दिया, परन्तु कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई।
स्थानीय NGOs और राजनीतिक प्रतिनिधियों का समर्थन मिलने के बाद भी यह आंदोलन शांति‑पूर्वक जारी है। आयोजकों ने कहा कि यदि मुख्य मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तीव्र हो सकता है, परन्तु वे अधिकारियों के साथ रचनात्मक संवाद के लिए तैयार हैं।
जैसे ही 51‑दिन का मील का पत्थर पार हो रहा है, पन्ना‑अजयगढ़ की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिससे उम्मीद है कि विकास के साथ विस्थापित परिवारों के अधिकारों और कल्याण को संतुलित करने वाला समाधान निकलेगा।
प्रदर्शक उचित आर्थिक मुआवजा, पूर्ण पुनर्वास और उन आपराधिक मामलों की वापसी की माँग कर रहे हैं, जिनके तहत उन्हें पहले के चरणों में केस दर्ज किए गए थे। उनका कहना है कि अब तक दिया गया मुआवजा अपर्याप्त है और कई परिवार अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
नए जिलाधिकारी के साथ हुई हालिया बातचीत के बाद आंदोलन के नेताओं ने प्रशासन के प्रति आशावाद जताया है। जिलाधिकारी ने मुआवजा और पुनर्वास योजनाओं की पुनः समीक्षा करने और लंबित आपराधिक मामलों को रद्द करने का आश्वासन दिया, परन्तु कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई।
स्थानीय NGOs और राजनीतिक प्रतिनिधियों का समर्थन मिलने के बाद भी यह आंदोलन शांति‑पूर्वक जारी है। आयोजकों ने कहा कि यदि मुख्य मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तीव्र हो सकता है, परन्तु वे अधिकारियों के साथ रचनात्मक संवाद के लिए तैयार हैं।
जैसे ही 51‑दिन का मील का पत्थर पार हो रहा है, पन्ना‑अजयगढ़ की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिससे उम्मीद है कि विकास के साथ विस्थापित परिवारों के अधिकारों और कल्याण को संतुलित करने वाला समाधान निकलेगा।