पोकरण नगर पालिका चुनावी चौसर जनता का फैसला: कांग्रेस 12, भाजपा 11, निर्दलीय 2 — बहुमत से एक कदम दूर कांग्रेस, बोर्ड की चाबी निर्दलीयों के हाथ 25 वार्डों में कांटे की टक्कर ने बढ़ाई सियासी हलचल, सभापति की कुर्सी के लिए अब शुरू होगा जोड़-तोड़ का दौर पोकरण।
पोकरण नगर पालिका चुनावी चौसर
जनता का फैसला: कांग्रेस 12, भाजपा 11, निर्दलीय 2 — बहुमत से एक कदम दूर कांग्रेस, बोर्ड की चाबी निर्दलीयों के हाथ
25 वार्डों में कांटे की टक्कर ने बढ़ाई सियासी हलचल, सभापति की कुर्सी के लिए अब शुरू होगा जोड़-तोड़ का दौर
पोकरण। जुगल किशोर बिस्सा प्रेस रिपोर्टर की विशेष रिपोर्ट।
पोकरण नगर पालिका चुनाव 2026 में मतदाताओं ने ऐसा जनादेश दिया है, जिसने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को सत्ता की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है। 25 वार्डों के सामने आए परिणाम में कांग्रेस ने 12 वार्ड जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में बढ़त बनाई है, जबकि भाजपा के खाते में 11 वार्ड आए हैं। दो वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर पालिका की सत्ता की पूरी तस्वीर ही रोमांचक बना दी है।
बहुमत का जादुई आंकड़ा 13 है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से महज एक सीट दूर है, जबकि भाजपा को सत्ता का बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों के समर्थन के साथ अतिरिक्त राजनीतिक गणित साधना होगा। यही वजह है कि परिणाम सामने आते ही पोकरण की सियासत में अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि दो निर्दलीय किस खेमे के साथ जाएंगे?
12 बनाम 11 का मुकाबला, दो निर्दलीय बने निर्णायक
परिणामों ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला दिखाया है। कांग्रेस ने वार्ड संख्या 1, 4, 6, 7, 11, 17, 18, 19, 20, 22, 23 और 25 में जीत दर्ज की।
वहीं भाजपा ने वार्ड 2, 3, 5, 8, 10, 12, 13, 15, 16, 21 और 24 में विजय हासिल की।
वार्ड 9 और 14 में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर दोनों प्रमुख दलों के समीकरण को उलझा दिया है। अब इन दोनों पार्षदों की भूमिका पालिका बोर्ड के गठन में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से एक सीट दूर
12 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन 13 के बहुमत आंकड़े से एक सीट कम रहने के कारण कांग्रेस के सामने भी चुनौती बरकरार है। यदि निर्दलीयों में से किसी एक का समर्थन कांग्रेस को मिलता है तो बोर्ड बनाने की राह आसान हो सकती है।
दूसरी ओर भाजपा 11 सीटों के साथ कांग्रेस से केवल एक सीट पीछे है। ऐसे में भाजपा के लिए भी दोनों निर्दलीयों को साधने अथवा राजनीतिक समीकरणों में सेंध लगाने का अवसर खुला हुआ है।
सभापति की कुर्सी पर सबकी नजर
पोकरण नगर पालिका में इस बार सभापति पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में पार्षदों के परिणाम के बाद अब अगली सबसे बड़ी सियासी लड़ाई सभापति पद को लेकर दिखाई देगी। पार्टियां अपने-अपने विजयी पार्षदों को एकजुट रखने के साथ ही निर्दलीयों के रुख पर भी नजर बनाए हुए हैं।
जनादेश ने साफ कर दिया है—पोकरण में मुकाबला खत्म नहीं हुआ, बल्कि बोर्ड गठन के साथ सियासी चौसर का दूसरा दौर शुरू हो गया है।
वार्डवार नतीजों की तस्वीर
दल
जीते वार्ड
कांग्रेस
12
भाजपा
11
निर्दलीय
2
कुल
25
अब सवाल सीटों का नहीं, समर्थन का है। 12 और 11 के बीच फंसी सत्ता की चाबी दो निर्दलीयों के हाथ में है। पोकरण में जनता का फैसला आ चुका है, अब नेताओं की रणनीति की परीक्षा शुरू हुई है।
जनता का फैसला: कांग्रेस 12, भाजपा 11, निर्दलीय 2 — बहुमत से एक कदम दूर कांग्रेस, बोर्ड की चाबी निर्दलीयों के हाथ
25 वार्डों में कांटे की टक्कर ने बढ़ाई सियासी हलचल, सभापति की कुर्सी के लिए अब शुरू होगा जोड़-तोड़ का दौर
पोकरण। जुगल किशोर बिस्सा प्रेस रिपोर्टर की विशेष रिपोर्ट।
पोकरण नगर पालिका चुनाव 2026 में मतदाताओं ने ऐसा जनादेश दिया है, जिसने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को सत्ता की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है। 25 वार्डों के सामने आए परिणाम में कांग्रेस ने 12 वार्ड जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में बढ़त बनाई है, जबकि भाजपा के खाते में 11 वार्ड आए हैं। दो वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर पालिका की सत्ता की पूरी तस्वीर ही रोमांचक बना दी है।
बहुमत का जादुई आंकड़ा 13 है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से महज एक सीट दूर है, जबकि भाजपा को सत्ता का बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों के समर्थन के साथ अतिरिक्त राजनीतिक गणित साधना होगा। यही वजह है कि परिणाम सामने आते ही पोकरण की सियासत में अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि दो निर्दलीय किस खेमे के साथ जाएंगे?
12 बनाम 11 का मुकाबला, दो निर्दलीय बने निर्णायक
परिणामों ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला दिखाया है। कांग्रेस ने वार्ड संख्या 1, 4, 6, 7, 11, 17, 18, 19, 20, 22, 23 और 25 में जीत दर्ज की।
वहीं भाजपा ने वार्ड 2, 3, 5, 8, 10, 12, 13, 15, 16, 21 और 24 में विजय हासिल की।
वार्ड 9 और 14 में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर दोनों प्रमुख दलों के समीकरण को उलझा दिया है। अब इन दोनों पार्षदों की भूमिका पालिका बोर्ड के गठन में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से एक सीट दूर
12 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन 13 के बहुमत आंकड़े से एक सीट कम रहने के कारण कांग्रेस के सामने भी चुनौती बरकरार है। यदि निर्दलीयों में से किसी एक का समर्थन कांग्रेस को मिलता है तो बोर्ड बनाने की राह आसान हो सकती है।
दूसरी ओर भाजपा 11 सीटों के साथ कांग्रेस से केवल एक सीट पीछे है। ऐसे में भाजपा के लिए भी दोनों निर्दलीयों को साधने अथवा राजनीतिक समीकरणों में सेंध लगाने का अवसर खुला हुआ है।
सभापति की कुर्सी पर सबकी नजर
पोकरण नगर पालिका में इस बार सभापति पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में पार्षदों के परिणाम के बाद अब अगली सबसे बड़ी सियासी लड़ाई सभापति पद को लेकर दिखाई देगी। पार्टियां अपने-अपने विजयी पार्षदों को एकजुट रखने के साथ ही निर्दलीयों के रुख पर भी नजर बनाए हुए हैं।
जनादेश ने साफ कर दिया है—पोकरण में मुकाबला खत्म नहीं हुआ, बल्कि बोर्ड गठन के साथ सियासी चौसर का दूसरा दौर शुरू हो गया है।
वार्डवार नतीजों की तस्वीर
दल
जीते वार्ड
कांग्रेस
12
भाजपा
11
निर्दलीय
2
कुल
25
अब सवाल सीटों का नहीं, समर्थन का है। 12 और 11 के बीच फंसी सत्ता की चाबी दो निर्दलीयों के हाथ में है। पोकरण में जनता का फैसला आ चुका है, अब नेताओं की रणनीति की परीक्षा शुरू हुई है।