📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Batthini Vinay Kumar Goud
धर्म
ओवैसी के विवाह बयानों पर भोपाल के संत समाज में उभरे लव जिहाद आरोपों की रोष
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 16 सित. 2026, 06:01 PM
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संघ मंत्री असदुद्दीन ओवैसी के ‘वयस्कों को अपनी इच्छा से शादी करने का अधिकार’ बयान पर भोपाल के संत समाज ने कड़ी निंदा की, लव जिहाद फंडिंग के आरोप लगाए।
संघ मंत्री असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कोई भी वयस्क जो अपनी इच्छा से शादी करना चाहता है, उसे रोकने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए और कानून को धर्म के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। यह टिप्पणी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विवाह कानूनों पर सार्वजनिक चर्चा के दौरान की गई थी।
भोपाल के संत समाज ने इस बयान पर तीखा विरोध जताया। इस धार्मिक संगठन के प्रमुखों ने ओवैसी के विचार को पारंपरिक मूल्यों के विरुद्ध बताया और लव जिहाद को समर्थन देने का आरोप लगाया, यह कहकर कि कानून का दुरुपयोग हो रहा है।
संत समाज ने यह भी कहा कि लव जिहाद के लिए फंडिंग ऐसे नेटवर्कों से हो रही है जो राजनीतिक हस्तियों से जुड़े हैं, हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस विवाद ने मध्य प्रदेश की राजधानी में साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ा दिया है, जबकि स्थानीय राजनेता शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं और किसी आधिकारिक जांच का इंतजार कर रहे हैं।
अब तक इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई दर्ज नहीं हुई है, और ओवैसी के कार्यालय ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। यह घटना भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं और विवाह कानूनों के राजनीतिकरण पर चल रहे बहसों में एक नया मोड़ जोड़ती है।
भोपाल के संत समाज ने इस बयान पर तीखा विरोध जताया। इस धार्मिक संगठन के प्रमुखों ने ओवैसी के विचार को पारंपरिक मूल्यों के विरुद्ध बताया और लव जिहाद को समर्थन देने का आरोप लगाया, यह कहकर कि कानून का दुरुपयोग हो रहा है।
संत समाज ने यह भी कहा कि लव जिहाद के लिए फंडिंग ऐसे नेटवर्कों से हो रही है जो राजनीतिक हस्तियों से जुड़े हैं, हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस विवाद ने मध्य प्रदेश की राजधानी में साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ा दिया है, जबकि स्थानीय राजनेता शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं और किसी आधिकारिक जांच का इंतजार कर रहे हैं।
अब तक इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई दर्ज नहीं हुई है, और ओवैसी के कार्यालय ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। यह घटना भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं और विवाह कानूनों के राजनीतिकरण पर चल रहे बहसों में एक नया मोड़ जोड़ती है।