📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gregorio Puga Bailón from A Coruña, Spain
विज्ञान
ऑएनजीसी एनर्जी सेंटर ने लद्दाख के पुगा वैली में भू‑तापीय ऊर्जा परियोजना शुरू की
✍️ jharkhandstatenews.com
🗓 05 सित. 2026, 01:03 PM
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ऑइल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के एनर्जी सेंटर ने लद्दाख के पुगा वैली में भू‑तापीय ऊर्जा उत्पादन के लिए कार्य आरंभ किया है।
नई दिल्ली – ऑइल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के एनर्जी सेंटर ने लद्दाख के पुगा वैली में भू‑तापीय ऊर्जा उत्पादन के लिए एक परियोजना शुरू करने की सूचना दी है। यह कदम ऊँचे पहाड़ी क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ONGC के इंजीनियर साइट सर्वेक्षण कर रहे हैं और भू‑तापीय निकासी के लिए आवश्यक प्रारंभिक बुनियादी ढाँचा स्थापित कर रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य पृथ्वी के प्राकृतिक गर्मी से बिजली उत्पन्न करना है, जो राष्ट्रीय ऊर्जा मिश्रण को विविध बनाने के लक्ष्य के साथ मेल खाता है। परियोजना की समय‑सीमा और क्षमता के बारे में अभी कोई विवरण नहीं दिया गया है।
पुगा वैली, जहाँ भू‑तापीय गतिविधि प्रचलित है, इस प्रकार के उद्यम के लिए अनुकूल स्थल माना जाता है। ONGC की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि कंपनी पारंपरिक तेल‑गैस कार्यों से आगे बढ़कर वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में भी सक्रिय है। स्थानीय अधिकारियों ने इस प्रयास का स्वागत किया है, क्योंकि यह क्षेत्रीय विद्युत आपूर्ति और सतत विकास के लिए लाभकारी हो सकता है।
परियोजना अभी प्रारम्भिक चरण में है, और अधिकारियों ने कहा है कि आगे के अध्ययन से व्यावसायिक उत्पादन की व्यवहार्यता और पैमाना तय होगा। यह पहल भारत में अभी तक पूरी तरह से उपयोग न किए गए भू‑तापीय संसाधनों को विकसित करने की बढ़ती रुचि को दर्शाती है, विशेषकर दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में।
पुगा वैली, जहाँ भू‑तापीय गतिविधि प्रचलित है, इस प्रकार के उद्यम के लिए अनुकूल स्थल माना जाता है। ONGC की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि कंपनी पारंपरिक तेल‑गैस कार्यों से आगे बढ़कर वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में भी सक्रिय है। स्थानीय अधिकारियों ने इस प्रयास का स्वागत किया है, क्योंकि यह क्षेत्रीय विद्युत आपूर्ति और सतत विकास के लिए लाभकारी हो सकता है।
परियोजना अभी प्रारम्भिक चरण में है, और अधिकारियों ने कहा है कि आगे के अध्ययन से व्यावसायिक उत्पादन की व्यवहार्यता और पैमाना तय होगा। यह पहल भारत में अभी तक पूरी तरह से उपयोग न किए गए भू‑तापीय संसाधनों को विकसित करने की बढ़ती रुचि को दर्शाती है, विशेषकर दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में।