📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dr. Chinchu C.
मौसम
पठानकोट में बाढ़ के एक साल बाद भी मुआवजे की प्रतीक्षा में पीड़ित
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 27 अग. 2026, 08:33 AM
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पठानकोट के सीमा क्षेत्र में 26‑27 अगस्त की बाढ़ के एक साल बाद भी कई पीड़ित मुआवजे की आशा में इंतजार कर रहे हैं।
पिछले साल 26‑27 अगस्त की रात को पठानकोट के सीमा क्षेत्र में अचानक बढ़ते जल ने सड़कों को नदियों में बदल दिया और कई परिवारों को बेघर कर दिया। इस अचानक आई बाढ़ ने घरों, खेती‑बाड़ी और बुनियादी ढाँचे को गंभीर क्षति पहुँचाई।
बाद में राज्य ने प्रभावित लोगों के लिये मुआवजा पैकेज की घोषणा की, परन्तु भुगतान प्रक्रिया में अटकाव बना हुआ है। कई परिवारों ने बताया कि वादा किया गया राहत धन अभी तक नहीं मिला, जिससे उन्हें नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने पंजाब सरकार से शीघ्र भुगतान की कई बार मांग की है, क्योंकि पीड़ितों को अब भी लंबी अवधि की आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। तत्काल राहत के तौर पर अस्थायी शरणस्थल और खाद्य वितरण किया गया, पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता अभी भी लंबित है।
एक साल की वर्षगांठ के निकट, समुदाय के नेता प्रशासन पर पारदर्शी समय‑सीमा और बकाया दावों के त्वरित निपटारे के लिये याचिका तैयार कर रहे हैं। इस देरी से दूरस्थ सीमा क्षेत्रों में आपदा पुनरुद्धार की चुनौतियों का पता चलता है।
अधिकारियों ने शेष भुगतान के लिये कोई निश्चित शेड्यूल नहीं बताया है, और प्रभावित परिवार अभी भी ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं, आशा करते हुए कि इस एक साल के बाद उन्हें वादा किया गया समर्थन मिल सकेगा।
बाद में राज्य ने प्रभावित लोगों के लिये मुआवजा पैकेज की घोषणा की, परन्तु भुगतान प्रक्रिया में अटकाव बना हुआ है। कई परिवारों ने बताया कि वादा किया गया राहत धन अभी तक नहीं मिला, जिससे उन्हें नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने पंजाब सरकार से शीघ्र भुगतान की कई बार मांग की है, क्योंकि पीड़ितों को अब भी लंबी अवधि की आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। तत्काल राहत के तौर पर अस्थायी शरणस्थल और खाद्य वितरण किया गया, पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता अभी भी लंबित है।
एक साल की वर्षगांठ के निकट, समुदाय के नेता प्रशासन पर पारदर्शी समय‑सीमा और बकाया दावों के त्वरित निपटारे के लिये याचिका तैयार कर रहे हैं। इस देरी से दूरस्थ सीमा क्षेत्रों में आपदा पुनरुद्धार की चुनौतियों का पता चलता है।
अधिकारियों ने शेष भुगतान के लिये कोई निश्चित शेड्यूल नहीं बताया है, और प्रभावित परिवार अभी भी ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं, आशा करते हुए कि इस एक साल के बाद उन्हें वादा किया गया समर्थन मिल सकेगा।