📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office, Government of India
सरकारी योजना
जैन धन योजना के हर चौथे खाते में निष्क्रियता, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक
✍️ Livemint
🗓 06 सित. 2026, 10:48 PM
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लिवेमिंट के विश्लेषण में पता चला कि जैन धन के हर चौथे खाते में निष्क्रियता है, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक निष्क्रिय खाते हैं, और लगभग 6 करोड़ खातों में शून्य शेष है।
लिवेमिंट के एक हालिया अध्ययन में बताया गया है कि भारत में जैन धन योजना के हर चार खातों में से एक निष्क्रिय है। वित्त मंत्रालय के पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 25 % लाभार्थियों ने अपने खाते सक्रिय रूप से उपयोग नहीं किए हैं।
इन निष्क्रिय खातों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। जबकि राज्य के सटीक आंकड़े नहीं बताए गए, इसकी संख्या किसी भी अन्य राज्य से अधिक है, जो इस जनसंख्या‑भारी राज्य में सक्रिय उपयोग की कमी को उजागर करता है।
इसके अलावा, लगभग 6 करोड़ जैन धन खाते शून्य शेष दिखा रहे हैं। ये खाते, जो वित्तीय समावेशन के उद्देश्य से खोले गए थे, अब तक किसी भी जमा को नहीं देख पाए हैं, जिससे योजना की पहुँच और उपयोगिता पर सवाल उठते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जागरूकता अभियानों को तेज़ करना और नियमित लेन‑देनों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए, ताकि निष्क्रिय खातों को फिर से सक्रिय किया जा सके और जैन धन योजना के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
इन निष्क्रिय खातों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। जबकि राज्य के सटीक आंकड़े नहीं बताए गए, इसकी संख्या किसी भी अन्य राज्य से अधिक है, जो इस जनसंख्या‑भारी राज्य में सक्रिय उपयोग की कमी को उजागर करता है।
इसके अलावा, लगभग 6 करोड़ जैन धन खाते शून्य शेष दिखा रहे हैं। ये खाते, जो वित्तीय समावेशन के उद्देश्य से खोले गए थे, अब तक किसी भी जमा को नहीं देख पाए हैं, जिससे योजना की पहुँच और उपयोगिता पर सवाल उठते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जागरूकता अभियानों को तेज़ करना और नियमित लेन‑देनों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए, ताकि निष्क्रिय खातों को फिर से सक्रिय किया जा सके और जैन धन योजना के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।