📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Sachinghai09
Derivative work: Radomian
सरकारी योजना
ODOP योजना से यूपी के कारीगरों को मेले में मिले नई संभावनाएँ
✍️ India Today
🗓 19 अग. 2026, 12:33 PM
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One District One Product (ODOP) मार्केटिंग विकास सहायता योजना यूपी के कारीगरों को मेले‑प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आर्थिक मदद दे रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने One District One Product (ODOP) पहल के तहत मार्केटिंग विकास सहायता योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को बड़े व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए आर्थिक मदद प्रदान करना है। इस योजना के तहत बूथ किराया, यात्रा, आवास और प्रचार सामग्री जैसी लागतें कवरेज की जाती हैं, जिससे कारीगर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शनों में अपने उत्पादों को प्रस्तुत कर सकें।
डिस्ट्रिक्ट स्तर की समितियों द्वारा पात्रता निर्धारित की जाती है, जो कारीगरों की शिल्पकला की प्रामाणिकता और सहायता की आवश्यकता की जाँच करती हैं। मंजूरी मिलने पर लाभार्थियों को एकमुश्त अनुदान मिलता है, जिसे वे पूरे कार्यक्रम के दौरान उपयोग कर सकते हैं, जिससे छोटे पैमाने के उत्पादकों पर वित्तीय बोझ कम हो जाता है।
यह योजना पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने, निर्यात क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण उत्तर प्रदेश में स्थायी आजीविका सृजन के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। पायलट जिलों में प्रारंभिक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि भाग लेने वाले कारीगरों को अधिक दर्शक और बढ़ते ऑर्डर मिल रहे हैं।
अधिकांश जिलों में इस योजना को अगले वित्तीय वर्ष में लागू करने की योजना है, साथ ही निधियों के पारदर्शी उपयोग और कारीगरों की आय पर प्रभाव को मापने के लिए नियमित निगरानी की जाएगी।
डिस्ट्रिक्ट स्तर की समितियों द्वारा पात्रता निर्धारित की जाती है, जो कारीगरों की शिल्पकला की प्रामाणिकता और सहायता की आवश्यकता की जाँच करती हैं। मंजूरी मिलने पर लाभार्थियों को एकमुश्त अनुदान मिलता है, जिसे वे पूरे कार्यक्रम के दौरान उपयोग कर सकते हैं, जिससे छोटे पैमाने के उत्पादकों पर वित्तीय बोझ कम हो जाता है।
यह योजना पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने, निर्यात क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण उत्तर प्रदेश में स्थायी आजीविका सृजन के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। पायलट जिलों में प्रारंभिक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि भाग लेने वाले कारीगरों को अधिक दर्शक और बढ़ते ऑर्डर मिल रहे हैं।
अधिकांश जिलों में इस योजना को अगले वित्तीय वर्ष में लागू करने की योजना है, साथ ही निधियों के पारदर्शी उपयोग और कारीगरों की आय पर प्रभाव को मापने के लिए नियमित निगरानी की जाएगी।