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ओडिशा के बालेश्वर में तस्करों की साज़िश नाकाम: घने जंगलों से 5 दुर्लभ विदेशी 'ओरांगउटान' बचाए गए, वन विभाग ने शुरू की जांच
ओडिशा के बालेश्वर में तस्करों की साज़िश नाकाम: घने जंगलों से 5 दुर्लभ विदेशी 'ओरांगउटान' बचाए गए, वन विभाग ने शुरू की जांच
बालेश्वर (ओडिशा):
ओडिशा के बालेश्वर जिले स्थित जलेश्वर वन प्रभाग के उदयपुर-विचित्रपुर के घने जंगलों से वन विभाग ने 5 दुर्लभ विदेशी वनमानुष (ओरांगउटान) को सुरक्षित बरामद किया है। नियमित गश्त के दौरान वन कर्मियों की नज़र इन पर पड़ी।
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (RCCF) प्रकाश चंद गोगिनेनी के अनुसार, बरामद किए गए 5 ओरांगउटान में 3 नर और 2 मादा शामिल हैं। सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है।
* तस्करी का अंदेशा: यह मामला अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से जुड़ा प्रतीत होता है। माना जा रहा है कि तस्करों ने ओडिशा तट के रास्ते इन्हें लाकर बालेश्वर के जंगलों में छोड़ दिया था।
* प्राकृतिक आवास: ओरांगउटान 'ग्रेट एप्स' (Great Apes) प्रजाति के जीव हैं, जो मूल रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों में पाए जाते हैं।
* विधिक कार्रवाई: वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि इन्हें किस रूट से ओडिशा लाया गया था।
नंदनकानन चिड़ियाघर में भेजे जाने की संभावना
वर्ष 2019 में नंदनकानन प्राणी उद्यान की 41 वर्षीय मादा ओरांगउटान 'बिनी' की मृत्यु के बाद से राज्य में कोई ओरांगउटान नहीं था। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद इन्हें नंदनकानन चिड़ियाघर में रखने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बालेश्वर (ओडिशा):
ओडिशा के बालेश्वर जिले स्थित जलेश्वर वन प्रभाग के उदयपुर-विचित्रपुर के घने जंगलों से वन विभाग ने 5 दुर्लभ विदेशी वनमानुष (ओरांगउटान) को सुरक्षित बरामद किया है। नियमित गश्त के दौरान वन कर्मियों की नज़र इन पर पड़ी।
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (RCCF) प्रकाश चंद गोगिनेनी के अनुसार, बरामद किए गए 5 ओरांगउटान में 3 नर और 2 मादा शामिल हैं। सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है।
* तस्करी का अंदेशा: यह मामला अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से जुड़ा प्रतीत होता है। माना जा रहा है कि तस्करों ने ओडिशा तट के रास्ते इन्हें लाकर बालेश्वर के जंगलों में छोड़ दिया था।
* प्राकृतिक आवास: ओरांगउटान 'ग्रेट एप्स' (Great Apes) प्रजाति के जीव हैं, जो मूल रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों में पाए जाते हैं।
* विधिक कार्रवाई: वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि इन्हें किस रूट से ओडिशा लाया गया था।
नंदनकानन चिड़ियाघर में भेजे जाने की संभावना
वर्ष 2019 में नंदनकानन प्राणी उद्यान की 41 वर्षीय मादा ओरांगउटान 'बिनी' की मृत्यु के बाद से राज्य में कोई ओरांगउटान नहीं था। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद इन्हें नंदनकानन चिड़ियाघर में रखने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।