📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Power
बिज़नेस
एनटीपीसी ने आंध्र प्रदेश में 1 GW सौर परियोजना के लिए टेंडर जारी
✍️ pv magazine India
🗓 10 अक्टू. 2026, 02:47 AM
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राज्य‑स्वामित्व वाली एनटीपीसी ने आंध्र प्रदेश में 1 GW सौर फोटोवोल्टिक परियोजना के लिए टेंडर जारी किया, जिससे राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
भारत की सबसे बड़ी विद्युत कंपनी, एनटीपीसी लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश में 1 GW सौर फोटोवोल्टिक (PV) परियोजना के लिए आधिकारिक टेंडर जारी किया है। कंपनी ने अपने प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से योग्य डेवलपर्स को डिजाइन, निर्माण, स्वामित्व और संचालन के लिए आमंत्रित किया है, जिसमें दीर्घकालिक पावर पर्चेज एग्रीमेंट (PPA) शामिल होगा।
यह परियोजना राज्य में अब तक की सबसे बड़ी सौर इंस्टालेशन में से एक होगी और आंध्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी, साथ ही एनटीपीसी के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। सटीक स्थल अभी घोषित नहीं किया गया है, पर टेंडर में बताया गया है कि अगले कुछ वर्षों में परियोजना का कंमिशनिंग लक्ष्य है।
विश्लेषकों का मानना है कि 1 GW की इस जोड़ से भारत के 2030 तक 500 GW नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का बड़े पैमाने पर सौर निवेश की ओर रुख, घटती पीवी लागत और सरकारी नीतियों के समर्थन को दर्शाता है।
टेंडर का मूल्यांकन तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्थिरता और समय पर परियोजना पूर्ण करने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। सफल बोलीदाता को राज्य की यूटिलिटी के साथ दीर्घकालिक पावर पर्चेज एग्रीमेंट मिलेगा, जिससे सौर संपत्ति को स्थिर राजस्व प्रवाह सुनिश्चित होगा।
परियोजना के पूर्ण होने पर यह सैकड़ों मेगावॉट स्वच्छ बिजली उत्पन्न करेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
यह परियोजना राज्य में अब तक की सबसे बड़ी सौर इंस्टालेशन में से एक होगी और आंध्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी, साथ ही एनटीपीसी के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। सटीक स्थल अभी घोषित नहीं किया गया है, पर टेंडर में बताया गया है कि अगले कुछ वर्षों में परियोजना का कंमिशनिंग लक्ष्य है।
विश्लेषकों का मानना है कि 1 GW की इस जोड़ से भारत के 2030 तक 500 GW नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का बड़े पैमाने पर सौर निवेश की ओर रुख, घटती पीवी लागत और सरकारी नीतियों के समर्थन को दर्शाता है।
टेंडर का मूल्यांकन तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्थिरता और समय पर परियोजना पूर्ण करने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। सफल बोलीदाता को राज्य की यूटिलिटी के साथ दीर्घकालिक पावर पर्चेज एग्रीमेंट मिलेगा, जिससे सौर संपत्ति को स्थिर राजस्व प्रवाह सुनिश्चित होगा।
परियोजना के पूर्ण होने पर यह सैकड़ों मेगावॉट स्वच्छ बिजली उत्पन्न करेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।