📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
राजनीति
एनएसएफ ने नागालैंड में स्वतंत्र इnner लाइन आयोग और कड़ी बीईएफआर नियमों की माँग की
✍️ Hub News
🗓 02 अक्टू. 2026, 01:01 AM
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नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने राज्य सरकार से स्वतंत्र इnner लाइन आयोग की स्थापना और बॉर्डर एन्फोर्समेंट एंड फ़ैसिलिटेशन रेगुलेशन (बीईएफआर) के कड़े प्रवर्तन की मांग की है।
नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने नागालैंड सरकार को एक स्वतंत्र इnner लाइन आयोग स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह संघ राज्य के विभिन्न छात्र समूहों का प्रतिनिधित्व करता है और कहता है कि एक स्वतंत्र आयोग इnner लाइन परमिट के आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा तथा नौकरशाही की देरी को कम करेगा।
इन्हीं मांगों के साथ, एनएसएफ ने बॉर्डर एन्फोर्समेंट एंड फ़ैसिलिटेशन रेगुलेशन (बीईएफआर) के कड़े प्रवर्तन की भी अपील की है। संघ का कहना है कि नियमों के ढीले लागू होने से अनियमितताएँ बढ़ रही हैं और यह सुरक्षा उद्देश्यों को कमजोर कर रहा है।
एनएसएफ के अधिकारियों ने कहा कि इन दो उपायों से नागालैंड की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और साथ ही वैध यात्रा व व्यापार को सुगम बनाया जा सकेगा। उन्होंने राज्य के गृह विभाग से शीघ्र कार्यवाही करने का आग्रह किया, यह बताते हुए कि यह प्रस्ताव छात्रों और स्थानीय समुदायों में व्यापक समर्थन पाता है।
अब तक राज्य सरकार ने इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक स्वतंत्र आयोग की स्थापना इnner लाइन परमिट प्रणाली के प्रबंधन में बड़ा बदलाव ला सकती है, जो 1950 के इnner लाइन समझौते की विरासत है।
यदि यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो यह हजारों निवासियों और आगंतुकों को प्रभावित करेगा, जो शिक्षा, रोजगार और पर्यटन के लिए इस परमिट प्रणाली पर निर्भर हैं।
इन्हीं मांगों के साथ, एनएसएफ ने बॉर्डर एन्फोर्समेंट एंड फ़ैसिलिटेशन रेगुलेशन (बीईएफआर) के कड़े प्रवर्तन की भी अपील की है। संघ का कहना है कि नियमों के ढीले लागू होने से अनियमितताएँ बढ़ रही हैं और यह सुरक्षा उद्देश्यों को कमजोर कर रहा है।
एनएसएफ के अधिकारियों ने कहा कि इन दो उपायों से नागालैंड की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और साथ ही वैध यात्रा व व्यापार को सुगम बनाया जा सकेगा। उन्होंने राज्य के गृह विभाग से शीघ्र कार्यवाही करने का आग्रह किया, यह बताते हुए कि यह प्रस्ताव छात्रों और स्थानीय समुदायों में व्यापक समर्थन पाता है।
अब तक राज्य सरकार ने इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक स्वतंत्र आयोग की स्थापना इnner लाइन परमिट प्रणाली के प्रबंधन में बड़ा बदलाव ला सकती है, जो 1950 के इnner लाइन समझौते की विरासत है।
यदि यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो यह हजारों निवासियों और आगंतुकों को प्रभावित करेगा, जो शिक्षा, रोजगार और पर्यटन के लिए इस परमिट प्रणाली पर निर्भर हैं।