📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
मनोरंजन
निविन पाउली ने मर्सिडीज‑बेंज को फिल्मिंग में लगातार देरी के लिए फटकारा
✍️ Outlook India
🗓 27 अग. 2026, 12:36 PM
👁 4
मलयालम अभिनेता निविन पाउली ने मर्सिडीज‑बेंज को फिल्म की शूटिंग में लगातार देरी के लिए सार्वजनिक रूप से फटकारा, क्योंकि कंपनी ने समय पर कारें नहीं पहुंचाईं।
मलयालम सिनेमा के प्रमुख अभिनेता निविन पाउली ने मर्सिडीज‑बेंज को अपने चल रहे फ़िल्म प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक कारों की डिलीवरी में लगातार देरी करने के लिए मीडिया में फटकारा। यह शिकायत आउटलुक इंडिया ने रिपोर्ट की, जिसमें पाउली ने शूटिंग शेड्यूल पर पड़े असर का ज़िक्र किया।
पाउली के अनुसार, ऑटोमेकर ने कई बार तय किए गए डिलीवरी तिथियों को पूरा नहीं किया, जिससे प्रोडक्शन टीम को दृश्यों को पुनः व्यवस्थित करना पड़ा और लोकेशन बुकिंग में अतिरिक्त खर्च हुआ। उन्होंने कहा कि इस देरी ने बजट बढ़ा दिया और अन्य क्रू सदस्यों के साथ समन्वय में बाधा उत्पन्न की।
मर्सिडीज‑बेंज ने अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, और फ़िल्म निर्माताओं के प्रवक्ता ने आगे कोई जानकारी देने से इनकार किया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लॉजिस्टिक समस्याएँ फ़िल्म इकाइयों और कॉर्पोरेट पार्टनरों के बीच संबंधों को तनावपूर्ण बना सकती हैं, विशेषकर जब ब्रांडेड कारें फ़िल्म के दृश्य आकर्षण का मुख्य भाग हों।
यह घटना भारतीय फ़िल्म निर्माण में अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों पर बढ़ते निर्भरता और अनुबंधीय समयसीमा के स्पष्ट निर्धारण की आवश्यकता को उजागर करती है, ताकि महंगे व्यवधानों से बचा जा सके।
पाउली के अनुसार, ऑटोमेकर ने कई बार तय किए गए डिलीवरी तिथियों को पूरा नहीं किया, जिससे प्रोडक्शन टीम को दृश्यों को पुनः व्यवस्थित करना पड़ा और लोकेशन बुकिंग में अतिरिक्त खर्च हुआ। उन्होंने कहा कि इस देरी ने बजट बढ़ा दिया और अन्य क्रू सदस्यों के साथ समन्वय में बाधा उत्पन्न की।
मर्सिडीज‑बेंज ने अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, और फ़िल्म निर्माताओं के प्रवक्ता ने आगे कोई जानकारी देने से इनकार किया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लॉजिस्टिक समस्याएँ फ़िल्म इकाइयों और कॉर्पोरेट पार्टनरों के बीच संबंधों को तनावपूर्ण बना सकती हैं, विशेषकर जब ब्रांडेड कारें फ़िल्म के दृश्य आकर्षण का मुख्य भाग हों।
यह घटना भारतीय फ़िल्म निर्माण में अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों पर बढ़ते निर्भरता और अनुबंधीय समयसीमा के स्पष्ट निर्धारण की आवश्यकता को उजागर करती है, ताकि महंगे व्यवधानों से बचा जा सके।