📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
मनोरंजन
नितेश तिवारी ने एलए प्रीमियर में 'रामायण: राइज़ ऑफ़ अ लीजेंड' में एआई के इस्तेमाल को खारिज किया
✍️ The Times of India
🗓 28 अक्टू. 2026, 08:58 AM
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निर्देशक नितेश तिवारी ने एलए विश्व प्रीमियर के दौरान स्पष्ट किया कि उनके महाकाव्य फ़िल्म 'रामायण: राइज़ ऑफ़ अ लीजेंड' में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग नहीं किया गया।
एलए में हुए "रामायण: राइज़ ऑफ़ अ लीजेंड" के विश्व प्रीमियर के दौरान नितेश तिवारी ने एआई के इस्तेमाल के बारे में उठे सवालों का जवाब दिया।
प्रेस ब्रीफिंग में तिवारी ने स्पष्ट किया कि फ़िल्म में किसी भी प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग नहीं किया गया है और सभी विज़ुअल इफ़ेक्ट्स मानवीय कलाकारों और तकनीशियनों द्वारा तैयार किए गए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि फ़िल्म में उन्नत विज़ुअल तकनीकें इस्तेमाल की गई हैं, परंतु यह पारंपरिक फ़िल्म बनाने की विधियों का ही परिणाम है। टीम के अनुभवी VFX कलाकारों और मोशन‑कैप्चर विशेषज्ञों के सहयोग को उन्होंने प्रमुखता से रेखांकित किया।
"रामायण: राइज़ ऑफ़ अ लीजेंड" एक बड़े बजट की महाकाव्य फ़िल्म है, जिसमें भारतीय पौराणिक कथाओं का आधार है और इसमें कई प्रमुख कलाकार शामिल हैं। फ़िल्म आने वाले महीनों में भारत के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।
यह बयान फ़िल्म उद्योग में एआई के नैतिक उपयोग पर चल रही बहस के बीच आया है, जहाँ कई फ़िल्म निर्माता और स्टूडियो इस तकनीक की संभावनाओं का पता लगा रहे हैं।
प्रेस ब्रीफिंग में तिवारी ने स्पष्ट किया कि फ़िल्म में किसी भी प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग नहीं किया गया है और सभी विज़ुअल इफ़ेक्ट्स मानवीय कलाकारों और तकनीशियनों द्वारा तैयार किए गए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि फ़िल्म में उन्नत विज़ुअल तकनीकें इस्तेमाल की गई हैं, परंतु यह पारंपरिक फ़िल्म बनाने की विधियों का ही परिणाम है। टीम के अनुभवी VFX कलाकारों और मोशन‑कैप्चर विशेषज्ञों के सहयोग को उन्होंने प्रमुखता से रेखांकित किया।
"रामायण: राइज़ ऑफ़ अ लीजेंड" एक बड़े बजट की महाकाव्य फ़िल्म है, जिसमें भारतीय पौराणिक कथाओं का आधार है और इसमें कई प्रमुख कलाकार शामिल हैं। फ़िल्म आने वाले महीनों में भारत के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।
यह बयान फ़िल्म उद्योग में एआई के नैतिक उपयोग पर चल रही बहस के बीच आया है, जहाँ कई फ़िल्म निर्माता और स्टूडियो इस तकनीक की संभावनाओं का पता लगा रहे हैं।