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08 नव. 2026•
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निरंजन राजाध्याक्ष ने फ्रंटलाइन में 1870 से भारत की आर्थिक सोच का विकास दर्शाया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
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निरंजन राजाध्याक्ष ने फ्रंटलाइन में 1870 से भारत की आर्थिक सोच का विकास दर्शाया

✍️ Frontline Magazine 🗓 08 नव. 2026, 04:03 AM 👁 21
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अर्थशास्त्री निरंजन राजाध्याक्ष ने फ्रंटलाइन के नवीन लेख में 1870 से आज तक भारतीय आर्थिक विचारों की प्रगति को रेखांकित किया है।

फ्रंटलाइन मैगज़ीन ने प्रमुख अर्थशास्त्री निरंजन राजाध्याक्ष के साथ एक विस्तृत साक्षात्कार प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने 1870 के औपनिवेशिक दौर से लेकर आज तक भारतीय आर्थिक सोच के विकास को रेखांकित किया है। राजाध्याक्ष ने बताया कि शुरुआती बहसें भूमि राजस्व और कृषि सुधारों पर केंद्रित थीं, जो धीरे‑धीरे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवादी आर्थिक विचारों में बदल गईं।

स्वातंत्र्य के बाद की नीति चर्चा मुख्यतः राज्य‑निर्देशित योजना और आत्मनिर्भरता की दिशा में थी, जबकि 1990 के दशक की उदारीकरण लहर ने बाजार एकीकरण और वैश्विक व्यापार को प्राथमिकता दी। वार्ता में समकालीन चुनौतियों, जैसे समावेशी विकास और डिजिटल परिवर्तन, को भी पिछले विचारधाराओं की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

यह विशेष लेख इतिहासिक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करता है, यह सुझाव देते हुए कि अतीत की बहसों से मिले सबक आज की असमानता और स्थिरता संबंधी रणनीतियों को आकार देने में मदद कर सकते हैं। राजाध्याक्ष का विश्लेषण पाठकों को एक सदी से अधिक समय में भारतीय आर्थिक सोच के विकास का संक्षिप्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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