📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pulakit Singh
अपराध
एनआईए कोर्ट ने 33 वर्ष बाद 78 वर्षीय व्यक्ति को साजिश के मामले में बरी किया
✍️ The Times of India
🗓 02 अग. 2026, 12:48 PM
👁 4
33 वर्षों के लंबी कानूनी संघर्ष के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी के न्यायालय ने साजिश के मामले में 78 वर्षीय प्रतिवादी को बरी कर दिया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के दिल्ली स्थित न्यायालय ने 33 वर्षों से लंबित साजिश के मामले में 78 वर्षीय प्रतिवादी को बरी कर दिया है। यह निर्णय 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुए लंबी सुनवाई के बाद आया है।
प्रतिवादी पर साजिश के आरोप लगाए गए थे, जिसे अक्सर राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में इस्तेमाल किया जाता है। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे और इसलिए आरोप खारिज कर दिए।
यह बरी होना भारत में साजिश कानून के उपयोग पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय समान कानूनों के तहत भविष्य के अभियोजन मामलों को प्रभावित कर सकता है।
एनआईए न्यायालय का निर्णय मंगलवार को सुनाया गया, जिसमें न्यायाधीश ने प्रतिवादी को किसी भी साजिश गतिविधि से जोड़ने वाले ठोस प्रमाण की कमी पर प्रकाश डाला। यह निर्णय प्रतिवादी और उसके परिवार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतिवादी पर साजिश के आरोप लगाए गए थे, जिसे अक्सर राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में इस्तेमाल किया जाता है। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे और इसलिए आरोप खारिज कर दिए।
यह बरी होना भारत में साजिश कानून के उपयोग पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय समान कानूनों के तहत भविष्य के अभियोजन मामलों को प्रभावित कर सकता है।
एनआईए न्यायालय का निर्णय मंगलवार को सुनाया गया, जिसमें न्यायाधीश ने प्रतिवादी को किसी भी साजिश गतिविधि से जोड़ने वाले ठोस प्रमाण की कमी पर प्रकाश डाला। यह निर्णय प्रतिवादी और उसके परिवार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है।