📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Imran hodekar1234
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एनजीटी ने बीड़ पापड़ की 2.9 हेक्टेयर जमीन को वन विभाग को सौंपने का आदेश, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र के 50 इकाइयों को संकट
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 02 अक्टू. 2026, 10:30 AM
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एनजीटी ने 30 दिनों के भीतर बीड़ पापड़ की 2.9087 हेक्टेयर जमीन को वन विभाग को सौंपने का निर्देश दिया, जिससे विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र की लगभग 50 इकाइयों को खतरा है।
राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को बीड़ पापड़ में स्थित 2.9087 हेक्टेयर जमीन को वन भूमि घोषित कर दिया। इस आदेश के तहत वन विभाग को 30 दिनों के भीतर इस भूखंड को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया गया, जबकि यह जमीन लगभग सात दशकों पहले राजस्थान एस्टेट ऑफिस (रीको) द्वारा आवंटित की गई थी।
यह जमीन विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा है, जहाँ लगभग 50 औद्योगिक इकाइयाँ सक्रिय हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि अचानक कब्जा लेने से उत्पादन में बाधा, रोजगार में कटौती और मुआवजे के संबंध में कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्य अधिकारियों ने कहा कि वे एनजीटी के आदेश की समीक्षा कर रहे हैं और वन विभाग के साथ मिलकर पर्यावरणीय दावों की जाँच करेंगे। प्रभावित कंपनियों ने आदेश के आधार और संभावित राहत उपायों के बारे में स्पष्टता की मांग की है।
यह निर्णय राजस्थान में औद्योगिक विकास और वन संरक्षण के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करता है, जहाँ छोटे‑स्तर के उत्पादन में तेज़ी से वृद्धि के साथ पर्यावरणीय जांच भी तीव्र हो रही है।
यह जमीन विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा है, जहाँ लगभग 50 औद्योगिक इकाइयाँ सक्रिय हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि अचानक कब्जा लेने से उत्पादन में बाधा, रोजगार में कटौती और मुआवजे के संबंध में कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्य अधिकारियों ने कहा कि वे एनजीटी के आदेश की समीक्षा कर रहे हैं और वन विभाग के साथ मिलकर पर्यावरणीय दावों की जाँच करेंगे। प्रभावित कंपनियों ने आदेश के आधार और संभावित राहत उपायों के बारे में स्पष्टता की मांग की है।
यह निर्णय राजस्थान में औद्योगिक विकास और वन संरक्षण के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करता है, जहाँ छोटे‑स्तर के उत्पादन में तेज़ी से वृद्धि के साथ पर्यावरणीय जांच भी तीव्र हो रही है।